महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता के बंदरबाट के लिए सेना बीजेपी में वाद.....भाजपा शिवसेना ये युति कैसी ?

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता के बंदरबाट के लिए सेना बीजेपी में वाद.....भाजपा शिवसेना ये युति कैसी ?

२४ अक्टूबर 2019 को महाराष्ट्र विधानसभा इलेक्शन के रिजल्ट बाहर आने से पहले शिवसेना और बीजेपी ने मिलकर चुनाव लढा जैसे २८८ विधानसभा क्षेत्र नतीजे इलेक्शन कमीशन ने डिक्लेयर कर दिए.जनता ने सत्ता के बहुमत के लिए दोनोंकी युति को मिलाकर बहुमत लिए फैसले किए. लेकिन सारे वादे इरादे भूलकर "किसीका बनेगा मुख्यमंत्री" इस बात पर बहोत सारी बाते दोनों मित्र पक्ष में सुरु हो गयी.अलग अलग न्यूज चैनलों पर अलग बयानबाजी रंग भरने लगी.हमेशा हिन्दू मुसलमान विषयो पर चर्चा करनेवाले कॉमेडी शोज की तरह 'शिवसेना या बीजेपी' 'मैं बनूंगा मुख्यमंत्री' देवेंद्र फडणवीस, 'फिफ्टी फिफ्टी' 'मुख्यमंत्री आदित्य ठाकरे बन सकते है?,' 'अपनी बातोंसे मुकर रही है बीजेपी' 'क्यो नही आये अमित शा' 'अब देवेन्द्र फडणवीस से बात नही' एक ना अनेक हेड लाइन बनाकर न्यूज चैनल्स दिवाली की छुटियो में इंटरटेनमेंट कर रही थी.
     
     एक दूसरे के साथ मिलकर इलेक्शन में विरोधीयो पर लांछन लगाने वाले,विरोधियोको बुरा बोलनेवाले युति के सहयोगी बीजेपी शिवसेना आज खुलकर एक दुसरे पर भुगतान लगा रहे है.सिर्फ सत्ता का लगाम किसके हाथ हो.
शिवसेना ,भाजपा युति को वोटिंग करनेवाला बेवकूफ तो नही.जिसने इन्हींके उमीदवारों को बड़े पैमाने में जिताकर दिया किसलिए, इस बातसे वोटर परेशान है.सोशल मीडिया पर एक युवक वोटर ने आम तौर से सवाल किया,"क्या हमने तुम्हें वोट देकर गलती की है." साथ ही कहा के "पिछले पाँच साल में गुणवता किसमे नजर ही नही आयी.पिछली बार भी सत्ता बनाने में भाजपा, शिवसेने की यही नौटंकी चल रही थी.जब सत्ता में साथ आये तो सत्ता में होते हुए भी शिवसेना भाजपा की मानो विरोधक ही रही.इस चुनाव के बाद फिर वही नौटंकी.हमने इन्हें हिंदुत्व के नाम पर वोट दिया था.क्या हम हिंदुत्व के नाम पर ठगे तो नही जा रहे है?"

    वोटरों के सामने महाराष्ट्र में सक्षम विकल्प भी तो नही है.काँग्रेस में राज्य नेतृत्व का अभाव और जो पुराने नेता है कोई मौका नही छोड़ते एक दूसरे को पाणी में दिखाने का और आपसी भेद इतने की डुबो दी काँग्रेस की नैय्या और राष्ट्रवादी काँग्रेस में ८० साल के शरद पवारजी को पिछले चुनाव में पक्ष की दयनीय हालत को देखते और विपक्ष की चुनौती को स्वीकार कर रिटायर्डमेन्ट न लेकर फिरसे नेतृत्व करने पड़ा.शरद पवारजी के बाद कौन ?फिर भी पिछले चुनाव के नतीजों को देखते अबके महाराष्ट्र की जनता ने काँग्रेस,राष्ट्रवादी काँग्रेस आघाडी को सक्षम विरोधी पक्ष के लिए जिताया .यह बात बहोत कुछ कह जाती है.

    इस बात को भी नजर अंदाज नही किया जा सकता है के बिना किस सक्षम नेतृत्व के कांग्रेस पार्टी के हक में वोटिंग और जीत हासिल करने वाले उमीदवार की संख्या को नजर अंदाज नही किया जा सकता. वोटर शायद अब हिंदुत्व के मुद्दे से उबग चुका है.मुसलमानो की बात करने वाली एमआईएम वंचित आघाडी खड़े होने से पहले बिखर गई.मुसलमान के बारे में मनघडत किस्से कहानियों की हकीकत हिन्दू वोटर  जान गया है.आज दिवाली के त्यौहार पर वह पैसा नही होनी से परेशान. ईद के लिए मुसलमान भी है बेहाल.बात बात पर राष्ट्रवाद भा नही रहा है.सरकार के कमियों पर कोई कुछ कहे तो भेज दो इन्हें पाकिस्तान की बात से सब है हैरान. जनता के सामने नहीं है पर्यायी नेतृत्व ,और विरोधियों भी दिखा नही पाए कर्तुत्व. यही भी तो कमी थी और है.मानना होंगा हम सब को फिरभी जाग रहा है मतदार.
     यह इस बात का दाखला है ना भाजपा शिवसेनेका एक नाही सारे युवक हो आम मतदार इनकी बंदरबाट से है परेशान और सभी की 'मन की बात' सोशल मीडिया पर बात को लिखा है एक हिन्दू युवक वोटरने सरे आम.दिल की बात सोशल मीडिया पर ही सही,लिखो तो सही.शायद कोई शर्म के मारे सियासत दानो में सकारात्मक बदलाओ आये और हमारे मुल्क के हालात में सुधार आये. एक उम्मीद .....                
                                           (अफ़ज़ल सय्यद अहमनगर)

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