कचरकुंडी से के सबक हम सब के लिए !
कचरकुंडी से के सबक हम सब
के लिए !
मोबाइल संशोधन की दुनिया में एक बहोत बडा क्रांतिकारी कदम दुनियावी सतेह पर साबित हो चुका है.हमारे देशमे यह शादी शुदा व्यक्ति के लिए मुसीबत नही कह सकता,क्योंके संशोधन का इस मॉडर्न जमाने मै अपमान समझता हूँ. लेकिन सर्व मान्यतासे बहुसंख्य बीवीयों का अपने शौहर का रिमोट कंट्रोल जरूर है.जब मोबाइल का अपने देश मे इस्तेमाल सुरु किया तो कॉमेडी शोज में ज्यादा जोक्स मियां बीवी के बारे में ही कहे गए.लेकिन हकीकत देखा जाए के मोबाइल आरोग्य, रोजगार,सामाजिक अनेक कारणों के लिए वरदान साबित हुआ है.
लगभग शामके साढ़े पाँच बज चुके थे.टेबल पर रखा था. मोबाइल की आवाज काल आने का इशारा कर रही थी.मोबाइल स्क्रीन नजर डाली,तो झुठ नही कहूंगा वो मेरे बच्चे की माँ का था.क्योंके मोबाइल में नंबर मेरी बेटी के नाम के साथ( ...... की माँ) कर सेव किया है.बेटे के नाम से क्यो नही किया ऐसी मजाकिया शिकायते मेरे घरमे होती है. हर बेटी अपने बाप की दुलारी होती है. उसमे उमर के देखते नवी पीढ़ी के ऐतबार से जुने खयाल के हम. फोन उठाने पर बच्ची की माँ कहने लगी."मैं मेरे बहन के घर और रुकी है.आप घर जाते वक्त यहाँ आईये,फिर साथ ही घर जाएंगे.वैसे भी दस पंधरा मिनट बाद दुकान बंद करना ही था. मैं दुकान के बाहर आया.बाहर लगे हुए मूवेबल बोर्ड दुकान के रखकर दुकान बंद करने के लिए.बोर्ड के पास पहुंचा. तो कचरकुंडी पर कुछ स्कूल की किताबें फेंकी दिखाई दी.दिल मे बात आयी देखे कौनसी किताबे है.पर दिमाग से एक मैसेज आया के पहले बोर्ड दुकान में रख ले,दुकान बंद करने बाद देखते है.क्या माजरा है?
दुकान को ताला लगाकर मैं कचरकुंडी के पास जाकर वहां पड़ी किताबो को देखा, पाँचवी क्लास किताबो में १)परिसर अभ्यास २)विज्ञान प्रयोगवही कृतिपुस्तिका ३)असे घडलो(ऐसे बने) पुस्तक का पन्ना कुछ फटा हुआ था. खीसे से मोबाइल निकाल फ़ोटो खिंची,सेल्फी नही निकाली.
परिसर अभ्यास , हमारे भारतदेश के लगभग हर शहरों में धुंए का पोल्यूशन (वायुप्रदूषण),पाणी का पोल्यूशन, आवाज(ध्वनि) पोल्यूशन ने धोके की सीमा पार कर चुकी है.हम सब को मालूम होंगा ,देश की राजधानी दिल्ली समेत कई बड़ी बड़ी शहर धुँए के प्रदूषण ने सभी सीमा धोके की सभी हदे पर कर गयी है.बांग्लादेश का दिल्ली में क्रिकेट मैच पोल्यूशन के वजह से रद्द होने तक चर्चा थी.लगभग शहर से बहने वाली हर नदीमें सभी शहरभर के नाले जोड़ दिए है.जब भी हम किसीभी ब्रिज से कभीभी कौनसे वक्तमे गुजरे हमें बदबू सूँघनी ही पड़ती है.शहर का सारा मैला उसी ब्रिज के नीचे से बहता रहता है.
देखे ना देश का सारा क्रीम(राष्ट्रपति,पंतप्रधान,सभी मंत्री ,देश के हर क्षेत्र के जिम्मेदार माने खासदार,सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश,बड़े बड़े प्रशासकीय अधिकारी जिनके अधिकार मे प्रदूषण कन्ट्रोल के जिम्मेदारी है.)होने के बावजूद सभी तरह का पोल्यूशन भारी है.क्योकी विज्ञान प्रयोगवही कृतिपुस्तिका कचरकुंडी पर नजर आ रही है.प्रयोग स्कूलों में किस तरह होते है.तो पता चलता है.अक्सर स्कूलों में लेब्रिटरीज़ ही नही थी और ना ही है.स्कूल परमिशन लेते देते वक्त होने वाला प्रदूषण माने करप्शन रोकना तो ना मुमकिन है.जानते है सब,तेरी भी चुप और मेरी भी.
तीसरी किताब का फटा पन्ना हमारी पूरी औकात बता रहा था.कह रहा था मराठी में,कह रहा था एक से "असे घडलो " याने ऐसे बने .उसी पन्ने पर बंदर कोई आदिमानव की तस्वीर छपी हुई थी. ये कचरकुंडी अहमदनगर में जिलाधिकारी ऑफिस के पास है.ये कुदरत का हमारे साथ बहोत बडा मजाक है.स्कूलों में पोल्यूशन का सब्जेक्ट सिखाया जाने लगा है.अहमियत इंग्लिश ,मैथ, सायन्स को ही है.वजह हर माँ बाप की उम्मीद दिमागी पोल्यूशन मेरा बेटा डॉक्टर या इंजीनियर बने. इसके लिए पर्यावरण पोल्यूशन सब्जेक्ट की मार्क्स की कहा गिनती है.पर्यावरण टैक्स वसूला जाता है . ये हकीकत है.पर पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम राबाने में शासनस्तर पर उदासीनता.यह कार्यक्रम स्कूल में मास्टर के जिम्मे.मास्टर भी तो वैसेभी स्कूल के रिजल्ट अच्छा लगे इस कारण पर्यावरण सब्जेक्ट में अच्छे मार्क्स दे ही देती है.बड़े बड़े नेता,
समाजसेवक,अधिकारी के पास पोल्यूशन का हल निकालने में वक्त है कहाँ ? खबरदार खबरदार खबरदार.
कचरकुंडी पर परिसर अभ्यास स्कूली किताबे फेकी है.आज है हम पोल्यूशन शिकार शिद्दत कुछ कम है.पर कल जानने में हमे देरी हुई होंगी ये घर के बच्चे समझेंगे.हमारे प्राण पखेरू पोल्यूशन के वजह से शरीरसे नींद में ही उड़ चुनके होंगे.आपके साथ मुझको भी पोल्यूशन रोकने का काम आज ही से सुरु करता हूं.आप भी आज ही से सुरु करे.
मेरे शहर के लोग बड़े आतिश बाज(आग से खेलनेवाले)है,
मेरा घर जल रहा है समंदर भी पास है।
(अफजल सय्यद, अहमदनगर)
के लिए !
मोबाइल संशोधन की दुनिया में एक बहोत बडा क्रांतिकारी कदम दुनियावी सतेह पर साबित हो चुका है.हमारे देशमे यह शादी शुदा व्यक्ति के लिए मुसीबत नही कह सकता,क्योंके संशोधन का इस मॉडर्न जमाने मै अपमान समझता हूँ. लेकिन सर्व मान्यतासे बहुसंख्य बीवीयों का अपने शौहर का रिमोट कंट्रोल जरूर है.जब मोबाइल का अपने देश मे इस्तेमाल सुरु किया तो कॉमेडी शोज में ज्यादा जोक्स मियां बीवी के बारे में ही कहे गए.लेकिन हकीकत देखा जाए के मोबाइल आरोग्य, रोजगार,सामाजिक अनेक कारणों के लिए वरदान साबित हुआ है.
लगभग शामके साढ़े पाँच बज चुके थे.टेबल पर रखा था. मोबाइल की आवाज काल आने का इशारा कर रही थी.मोबाइल स्क्रीन नजर डाली,तो झुठ नही कहूंगा वो मेरे बच्चे की माँ का था.क्योंके मोबाइल में नंबर मेरी बेटी के नाम के साथ( ...... की माँ) कर सेव किया है.बेटे के नाम से क्यो नही किया ऐसी मजाकिया शिकायते मेरे घरमे होती है. हर बेटी अपने बाप की दुलारी होती है. उसमे उमर के देखते नवी पीढ़ी के ऐतबार से जुने खयाल के हम. फोन उठाने पर बच्ची की माँ कहने लगी."मैं मेरे बहन के घर और रुकी है.आप घर जाते वक्त यहाँ आईये,फिर साथ ही घर जाएंगे.वैसे भी दस पंधरा मिनट बाद दुकान बंद करना ही था. मैं दुकान के बाहर आया.बाहर लगे हुए मूवेबल बोर्ड दुकान के रखकर दुकान बंद करने के लिए.बोर्ड के पास पहुंचा. तो कचरकुंडी पर कुछ स्कूल की किताबें फेंकी दिखाई दी.दिल मे बात आयी देखे कौनसी किताबे है.पर दिमाग से एक मैसेज आया के पहले बोर्ड दुकान में रख ले,दुकान बंद करने बाद देखते है.क्या माजरा है?
दुकान को ताला लगाकर मैं कचरकुंडी के पास जाकर वहां पड़ी किताबो को देखा, पाँचवी क्लास किताबो में १)परिसर अभ्यास २)विज्ञान प्रयोगवही कृतिपुस्तिका ३)असे घडलो(ऐसे बने) पुस्तक का पन्ना कुछ फटा हुआ था. खीसे से मोबाइल निकाल फ़ोटो खिंची,सेल्फी नही निकाली.
परिसर अभ्यास , हमारे भारतदेश के लगभग हर शहरों में धुंए का पोल्यूशन (वायुप्रदूषण),पाणी का पोल्यूशन, आवाज(ध्वनि) पोल्यूशन ने धोके की सीमा पार कर चुकी है.हम सब को मालूम होंगा ,देश की राजधानी दिल्ली समेत कई बड़ी बड़ी शहर धुँए के प्रदूषण ने सभी सीमा धोके की सभी हदे पर कर गयी है.बांग्लादेश का दिल्ली में क्रिकेट मैच पोल्यूशन के वजह से रद्द होने तक चर्चा थी.लगभग शहर से बहने वाली हर नदीमें सभी शहरभर के नाले जोड़ दिए है.जब भी हम किसीभी ब्रिज से कभीभी कौनसे वक्तमे गुजरे हमें बदबू सूँघनी ही पड़ती है.शहर का सारा मैला उसी ब्रिज के नीचे से बहता रहता है.
देखे ना देश का सारा क्रीम(राष्ट्रपति,पंतप्रधान,सभी मंत्री ,देश के हर क्षेत्र के जिम्मेदार माने खासदार,सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश,बड़े बड़े प्रशासकीय अधिकारी जिनके अधिकार मे प्रदूषण कन्ट्रोल के जिम्मेदारी है.)होने के बावजूद सभी तरह का पोल्यूशन भारी है.क्योकी विज्ञान प्रयोगवही कृतिपुस्तिका कचरकुंडी पर नजर आ रही है.प्रयोग स्कूलों में किस तरह होते है.तो पता चलता है.अक्सर स्कूलों में लेब्रिटरीज़ ही नही थी और ना ही है.स्कूल परमिशन लेते देते वक्त होने वाला प्रदूषण माने करप्शन रोकना तो ना मुमकिन है.जानते है सब,तेरी भी चुप और मेरी भी.
तीसरी किताब का फटा पन्ना हमारी पूरी औकात बता रहा था.कह रहा था मराठी में,कह रहा था एक से "असे घडलो " याने ऐसे बने .उसी पन्ने पर बंदर कोई आदिमानव की तस्वीर छपी हुई थी. ये कचरकुंडी अहमदनगर में जिलाधिकारी ऑफिस के पास है.ये कुदरत का हमारे साथ बहोत बडा मजाक है.स्कूलों में पोल्यूशन का सब्जेक्ट सिखाया जाने लगा है.अहमियत इंग्लिश ,मैथ, सायन्स को ही है.वजह हर माँ बाप की उम्मीद दिमागी पोल्यूशन मेरा बेटा डॉक्टर या इंजीनियर बने. इसके लिए पर्यावरण पोल्यूशन सब्जेक्ट की मार्क्स की कहा गिनती है.पर्यावरण टैक्स वसूला जाता है . ये हकीकत है.पर पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम राबाने में शासनस्तर पर उदासीनता.यह कार्यक्रम स्कूल में मास्टर के जिम्मे.मास्टर भी तो वैसेभी स्कूल के रिजल्ट अच्छा लगे इस कारण पर्यावरण सब्जेक्ट में अच्छे मार्क्स दे ही देती है.बड़े बड़े नेता,
समाजसेवक,अधिकारी के पास पोल्यूशन का हल निकालने में वक्त है कहाँ ? खबरदार खबरदार खबरदार.
कचरकुंडी पर परिसर अभ्यास स्कूली किताबे फेकी है.आज है हम पोल्यूशन शिकार शिद्दत कुछ कम है.पर कल जानने में हमे देरी हुई होंगी ये घर के बच्चे समझेंगे.हमारे प्राण पखेरू पोल्यूशन के वजह से शरीरसे नींद में ही उड़ चुनके होंगे.आपके साथ मुझको भी पोल्यूशन रोकने का काम आज ही से सुरु करता हूं.आप भी आज ही से सुरु करे.
मेरे शहर के लोग बड़े आतिश बाज(आग से खेलनेवाले)है,
मेरा घर जल रहा है समंदर भी पास है।
(अफजल सय्यद, अहमदनगर)


टिप्पण्या
टिप्पणी पोस्ट करा