न्यूज चॅनेल आज नफरते क्यों फैलाती है ?

न्यूज चॅनेल आज नफरते क्यों फैलाती है ? 

    भारतीय हिंदी न्यूज चॅनेल मानो जैसे हिंदू और मुस्लिम समाज मे तेड निर्माण करने की स्पर्धा में लगे हुए है,ऐसा ही लग रहा है.मेरा तो इल्जाम है के दिल्लीके माहौल खराब करने में नफरते हिन्दू और मुसलमानोमे अहम भूमिका लगभग सभी हिंदी न्यूज चैनलों ने ही निभाई.अब लोगोमे को लगाने लगा है के भारतीय हिंदी न्यूज चॅनेल को अब भारतीय हिंदी हेट न्यूज चॅनेल कर संबोधित करने के लिए सरकारने विशेषरूप से मान्यता दे देनी चाहिये.ताके हम सभी हिन्दू मुस्लिम अमन पसंद लोग हेट न्यूज हिंदी चॅनेल अपने केबल ऑपरेटर से खरीदेंगे नही देखेंगे तो देखेंगे नही.
     आज सुबह से लेकर शामतक मैं अफजल और मेरा पड़ोसी  दुकानवाला अशोक मामा एक दूसरे पर पूरा विश्वास रख कर बाहर अपने अपने जरूरी काम से दुकान खुला रख बार बार जाते है.अर्जेन्ट कोई ग्राहक आये तो एक दूसरे को फ़ोन कर बुलाते है.जब दिल्ली नफरतो जल रही थी.हमारे दुकानो के लाईन में अमीन भाई का सलून है.इतवार होने से मेरी दुकान बंद रहती है. अशोक मामा का फोन आया कि,अफजल भाई ,अमीन की माँ का इन्तेकाल (देहांत)हो गया.मैं रास्ते मे ही था,गाड़ी मोड़ अमीन के घर पर पहोंचा,अशोक मामा दुकान बंद कर सुबह से मेरे पहके अमीन के घर अमिनके साथ ही बैठे हुए थे.अमीन की अशोक मामा की दोस्ती 20 साल पुरानी थी.बचपन की नही.
     अमीन यूपी से आया हुआ और अशोक मामा की पैदास हमारे ही शहर की है.तब से लेकर आजतक दोनो का एक दिन भी ऐसा  नही गया होंगा के दोनोने मिलकर एक साथ मिलकर चाय न पी हो.कभी कीसी वक्त किसी काम से दोनोंमें से एक व्यक्ति बाहर गाँव चली जाए तो दोनों एक दुसरेकी खैर खबर मोबाइल पर लेते है.दोनोमे से एक नजर नही आये तो दूसरा क्यों नही आया इस बात की पक्की जानकारी मिलेगी.अमीन के चार बच्चियों की शादीया हुए अशोक मामा को हर कम ज्यादा की बात अमीन बताता था और मामा की शादी शुदा बच्चियों के क्या चल रहा है. लड़के के रिश्ते की बात कहा तक आयी हर एक छोटी बडी बात छोटा बड़ा सुख दुख वे एक दूसरे का बाटते है.मैं भी उनके सुख दुख उनसे बाट लेता हूँ. अशोक मामा कभी कबार एक दिन दुकान बंद रखे तो,बहोत कमी महसूस होती है.क्योके दिनमें से कई बार उनकी जरूरत पड़ती है.
      जरूरत के कई शकले होती है. चाहे छुट्टे पैसे हो या स्क्रू पाना छोटी छोटी बाते अहसास दिलाती है.अशोक मामा,अमीन और मैं गर चंद सालो में एक दूसरे की जरूरत बन गए है,कभी किसीकी जात किसीभी काम मे नफरत पैदा नही कर पाती है आजतक,लेकिन जब घर काम धंदे से थक कर पहुंचते है,फ्रेश हो कर हिंदी न्यूज चॅनेल लगाते ही हिंदू मुस्लिम की नफरतें फैलाने वाली बातें कर रही थी एंकर. न्यूज चॅनेल का नाम  था आजतक.जब के अशोक मामा ,अमीन और मैं एक दूसरे की जरूरत बन चुके है पिछले कई सालोंसे लेकर आजतक.जब दूसरा न्यूज चॅनेल बदलकर देखा, नाम भारत वर्ष नजर आया.डिबेट वो भी हिंदू मुसलमान नफरतो के बढ़ावे की ही करवा रहा था.फिर न्यूज चॅनेल बदला कोई इंडिया,कोई न्यूज इंडिया,कोई झी, कोई सुदर्शन अलग अलग नाम से मूसलमानो को एकतरफा मुजरिम ठहराकर हिंदू मुसलमान नफरतो के बोल फैलाकर एक दूसरे के दिलो को चिल्ला चिल्लाकर  दूषित कर रहे थे टीआरपी के लिए.दिल्ली के जलने में न्यूज चॅनेल का बहोत बडा किरदार है.
    अभी मैं आर्टिकल लिखा ही रहा हूँ, अमीन की दुकान हर सोमवार को बंद ही रहती है,सोमवार को मेरी दुकान खुलने का हप्ते का पहला दिन होता है.मामा की दुकान हर रोज खुली रहती है. आज मामा की दुकान बंद है.मुबीन आ कर मुझे पूछ रहा है,मामा की दुकान बंद क्यो है? मामा का फोन भी बंद है.मैं झेरोक्स निकाल रहा था.अमीन ने सलाम किया.सलाम के जवाब के बाद मेरा सवाल अमिन से वही था,जो मुबीन ने मुझसे किया था.अमीन ने बताया के मामा पांढरी के पुल गए है.आयुर्वेदिक दवा के लिए.
     मैं अपने आप मुस्कुराया, अमीन को अशोक की और अशोक को अमीन के सुख दुख की फिक्र जब तक है.देश मे न्यूज चॅनेल टीआरपी के लिए कितनी भी नफरतो की चीख चीखकर मुसलमानो को खिलाफ बात करे असर नही हो सकता.क्यो के अशोक की उम्र ६० साल,अमीन की ५२ साल और मेरी याने अफजल की ५५ साल की उम्र है.ये बात हमारी ही बात नही.हमारे बच्चे भी एक दूसरे के अच्छे दोस्त है.हिंदू और मुसलमानों के इतिहास भी आजादी के  बाद से आज तक देखे हमारे बाप दादा से लेकर अपने बच्चे कई रमजान हो या दिवाली एक दूसरे के साथ मनाई है.जूता गर प्रकाश की दुकान से लिया तो तौसीफ से शेरवानी सिलवाई है.अमन के दुश्मनों लाख करली कोशिशें तुमने सदियोसे हिंदू मुस्लिम में दरार पैदा करने की और आज भी कोशिशे जारी है. सच बताओ कुछ फसादात के सिवा क्या आज भी तुम कामयाब हो पाए हो ? हो भी नही पाओगे.हमारी एकता की जड़े बहोत मजबूत है.

अफझल सय्यद, अहमदनगर, महाराष्ट्र.

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