खीसेमे पैसा नही और शहर में रहना मुमकिन नही.ऐसे कैसे लगा दिए प्रधानमंत्री जनता कर्फ्यू? मजदूरों के मनकी बात !
खीसेमे पैसा नही और शहर में रहना मुमकिन नही.ऐसे कैसे लगा दिए प्रधानमंत्री जनता कर्फ्यू? मजदूरों के मनकी बात !
२० मार्च २०२० को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया पर रात ८.०० बजे आकर ,रात १२.०० के बाद से देश भर में से लॉक डाउन का ऐलान ,करोना वायरस के असर को रोकने के लिए १४ एप्रिल २०२० तक किया गया है.सिर्फ ४ घंटे का वक्त में भारतीय नागरिक दुकानसे जीवनावश्यक खाने पकाने के चीजो खरीदी के लिए घर से बाहर निकाला ,तो बड़ी भीड़ रास्तेपर उमड़ पड़ी.करोना बीमारी के फैलने की असल जड़ ही भीड़ है.यह देख पुलिस प्रशासन ने भीड़ फैलाने के लिए कई कई जगह लाठी चार्ज किये.कुछ सामान खरीदे कुछ पोलिसी लाठी के डर से भागते भगाते, कल की फ़िक्र को लिए अपने घर लौट आये थे.लॉक डाउन में बस बंद, रेल की यातायात बंद और देश विदेश हवाई जहाज की आने जाने वाली उड़ाने भी बंद.देश विदेश के प्रवासी जगह पर जहाँ थे वही लॉक.
लॉक डाउन याने जनता कर्फ्यूके दो चार दिन गुजरने के बाद मोल मजदूरी करने वाले एक बड़े तबके को महसूस होने लगा,आज हमारे खीसे में पैसे नही.शहर में अब रहना मुश्किल है.भारत के अलग अलग राज्य के बडे शहरोंमें रोजगार के लिए आया मजदूर ,अब अपने परिवार के साथ अवैध तरके से कंटेनर,दूध के टैंकर में भेड बकरियों सा बैठकर अपने गाँव की ओर निकल पड़ा और पोलिस की चेकिंग में पकड़ में आया. बीच रास्ते मे अटक गया.दिल्ली के आंनद विहार आंतर राज्यीय बस स्टैंड पर अपने अपने गांव जाने के लिए उभरी भीड़ के सैलाब करोना को रोकने लॉक डाउन को तोड़ कर जम गया था.दिल्ली सरकार और यू.पी.सरकार को बस मोहिया(उपलब्ध) करवाना पड़ा.कुछ राज्य में कई लोग सैकड़ो मिल पैदल निकल पडे.असहाय भारतीय नागरिकोकी परेशान और हडबडा गया जनसमुदाय रास्ते से निकल पड़ा,कैसी सोशल डिस्टनिंग और कैसे कानून का पालन सिर्फ गाँव को पहोचाना है.
पैदल निकले लोगोकी प्रतिक्रिया बड़ी अजीब है.कहते है,"यहाँ शहर में मरे तो हमारा क्रियाकर्म करने कौन आयेगा? गांव में रिस्तेदार तो है!यहाँ मरने से बेहतर गाँव जाकर मारेंगे." कोरोना महामारी को रोकने के लिये सरकारने लोक डाउन याने जनता कर्फ्यू देश भरमे जारी कर दिया.लेकिन देश के नेतृत्व ने असहाय लोगोंके पेटपानी का क्या?इस बारे में गंभीरता से कोई विचार नही किया.आफत की पूर्व हालात से आफत आने की जानकारी मिल चुकी थी.देश से महत्वपूर्ण मध्य प्रदेश की सत्ता काबिज करनेंमे केंद्र सरकार का लक्ष केंद्रित था.ऐसा इसलिए लगता है के,मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शपथविधि के बाद ही २० मार्च को लोकडाउन याने जनता कर्फ्यू देशभरमें जारी किया गया.
तो जाहिर सी बात है,सरकार ने असहाय लोगोंके पेटपानी का कोई विचार किया ही नही गया.आपत्ती व्यवस्थापन का कोई भी पूर्वनियोजन नही था.हमेशा की तरह.आपत्तिपूर्व कोई नियोजन होता नही और आपत्ति आकर जानेपर भी कोई बोध लिया नही जाता. ऐसी हमारी आपत्ति व्यवस्थापन की गांव से लेकर केंद्र तक ख्याति है.यह बहोत सारे नागरिकोंका आरोप है.देश के सामने करोना महामारी के जनता कर्फ्यू को लागू करने से पहले मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नोकरशाह को कोई भी जानकारी नही थी और नाही आपत्ति व्यवस्थापन की कोई तैयारीयां. मानले की देश मे नेतृत्व को अपनी गलती का एहसास हुआ,तब जाके उन्होंने मन की बात इस प्रोग्राम के जरिये टीवी पर आ कर देश की जनता से माफी मांगी.देशहित के खातिर हमने नजरअंदाज भी कर दिया.
देश की सभी राज्य सरकार, सभी पक्ष के जिम्मेदार लीडर,वरिष्ठ नोकरशाह, आपत्ति व्यवस्थापन को विश्वास में लेकर की लोकशाहिमें फैसले लेना देशहितमें होता है.उन्हें प्रधानमंत्री द्वारा विश्वास में क्यों नही लिया ? ऐसी गलती जनता के हित मे देश के नेतृत्व से हो ये अच्छी बात नही है!
अफज़ल सय्यद,अहमदनगर, महाराष्ट्र.
२० मार्च २०२० को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया पर रात ८.०० बजे आकर ,रात १२.०० के बाद से देश भर में से लॉक डाउन का ऐलान ,करोना वायरस के असर को रोकने के लिए १४ एप्रिल २०२० तक किया गया है.सिर्फ ४ घंटे का वक्त में भारतीय नागरिक दुकानसे जीवनावश्यक खाने पकाने के चीजो खरीदी के लिए घर से बाहर निकाला ,तो बड़ी भीड़ रास्तेपर उमड़ पड़ी.करोना बीमारी के फैलने की असल जड़ ही भीड़ है.यह देख पुलिस प्रशासन ने भीड़ फैलाने के लिए कई कई जगह लाठी चार्ज किये.कुछ सामान खरीदे कुछ पोलिसी लाठी के डर से भागते भगाते, कल की फ़िक्र को लिए अपने घर लौट आये थे.लॉक डाउन में बस बंद, रेल की यातायात बंद और देश विदेश हवाई जहाज की आने जाने वाली उड़ाने भी बंद.देश विदेश के प्रवासी जगह पर जहाँ थे वही लॉक.
लॉक डाउन याने जनता कर्फ्यूके दो चार दिन गुजरने के बाद मोल मजदूरी करने वाले एक बड़े तबके को महसूस होने लगा,आज हमारे खीसे में पैसे नही.शहर में अब रहना मुश्किल है.भारत के अलग अलग राज्य के बडे शहरोंमें रोजगार के लिए आया मजदूर ,अब अपने परिवार के साथ अवैध तरके से कंटेनर,दूध के टैंकर में भेड बकरियों सा बैठकर अपने गाँव की ओर निकल पड़ा और पोलिस की चेकिंग में पकड़ में आया. बीच रास्ते मे अटक गया.दिल्ली के आंनद विहार आंतर राज्यीय बस स्टैंड पर अपने अपने गांव जाने के लिए उभरी भीड़ के सैलाब करोना को रोकने लॉक डाउन को तोड़ कर जम गया था.दिल्ली सरकार और यू.पी.सरकार को बस मोहिया(उपलब्ध) करवाना पड़ा.कुछ राज्य में कई लोग सैकड़ो मिल पैदल निकल पडे.असहाय भारतीय नागरिकोकी परेशान और हडबडा गया जनसमुदाय रास्ते से निकल पड़ा,कैसी सोशल डिस्टनिंग और कैसे कानून का पालन सिर्फ गाँव को पहोचाना है.
पैदल निकले लोगोकी प्रतिक्रिया बड़ी अजीब है.कहते है,"यहाँ शहर में मरे तो हमारा क्रियाकर्म करने कौन आयेगा? गांव में रिस्तेदार तो है!यहाँ मरने से बेहतर गाँव जाकर मारेंगे." कोरोना महामारी को रोकने के लिये सरकारने लोक डाउन याने जनता कर्फ्यू देश भरमे जारी कर दिया.लेकिन देश के नेतृत्व ने असहाय लोगोंके पेटपानी का क्या?इस बारे में गंभीरता से कोई विचार नही किया.आफत की पूर्व हालात से आफत आने की जानकारी मिल चुकी थी.देश से महत्वपूर्ण मध्य प्रदेश की सत्ता काबिज करनेंमे केंद्र सरकार का लक्ष केंद्रित था.ऐसा इसलिए लगता है के,मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शपथविधि के बाद ही २० मार्च को लोकडाउन याने जनता कर्फ्यू देशभरमें जारी किया गया.
तो जाहिर सी बात है,सरकार ने असहाय लोगोंके पेटपानी का कोई विचार किया ही नही गया.आपत्ती व्यवस्थापन का कोई भी पूर्वनियोजन नही था.हमेशा की तरह.आपत्तिपूर्व कोई नियोजन होता नही और आपत्ति आकर जानेपर भी कोई बोध लिया नही जाता. ऐसी हमारी आपत्ति व्यवस्थापन की गांव से लेकर केंद्र तक ख्याति है.यह बहोत सारे नागरिकोंका आरोप है.देश के सामने करोना महामारी के जनता कर्फ्यू को लागू करने से पहले मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नोकरशाह को कोई भी जानकारी नही थी और नाही आपत्ति व्यवस्थापन की कोई तैयारीयां. मानले की देश मे नेतृत्व को अपनी गलती का एहसास हुआ,तब जाके उन्होंने मन की बात इस प्रोग्राम के जरिये टीवी पर आ कर देश की जनता से माफी मांगी.देशहित के खातिर हमने नजरअंदाज भी कर दिया.
देश की सभी राज्य सरकार, सभी पक्ष के जिम्मेदार लीडर,वरिष्ठ नोकरशाह, आपत्ति व्यवस्थापन को विश्वास में लेकर की लोकशाहिमें फैसले लेना देशहितमें होता है.उन्हें प्रधानमंत्री द्वारा विश्वास में क्यों नही लिया ? ऐसी गलती जनता के हित मे देश के नेतृत्व से हो ये अच्छी बात नही है!
अफज़ल सय्यद,अहमदनगर, महाराष्ट्र.



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