राष्ट्रभक्त भारतीय मुसलमानो की गुहार,असम के एनआरसी नाकामयाबी के बाद,एनआरसी पर और रुपया बर्बाद न करे सरकार!
राष्ट्रभक्त भारतीय मुसलमानो की गुहार,असम के एनआरसी नाकामयाबी के बाद,एनआरसी पर और रुपया बर्बाद न करे सरकार!
#गर एनआरसी लागू हो तो कोईभी दस्तावेज जमा ना करे...
#नागरिकता संविधान बील का विरोध करते है....."तेरे दादा का नाम क्या है ?"मेरे सवाल पर वो बोला,"नही मालूम"
"तेरे अब्बा क्या करते है ?" मेरे अगले सवाल पर उसने जवाब दिया."अब्बा तो मैं बहोत छोटा था,तब गुजर गए है.सुना यही कही गैरेज में फिटर काम करते थे."
उसकी बूढ़ी अम्मा रास्ते से जा रही थी.उसे मेरे शॉप में बैठा देख आवाज दे रास्ते के किनारे रुक गयी.वो उठ अम्मा के पास गया, उसे कैरीबैग निकाल कागज बता रही थी.कही साथ चलने को कह रही थी.उसने अम्मा में हाथ से कागज लिए मेरे पास आया.अम्मा पीछे से कह रही "अरे बेटा मेरे साथ चल,कागज कहा ले जा रहा है"कहते हुए उसके7 पीछे मेरे शॉप के पायरी के पास आ रुक गयी.उसके बेटे ने कागज दिखाकर मुझसे कहा "चाचा,अब्बाका मृत्यु दाखल बनाना है"
मैंने पूछा "अबतक मृत्यु दाखला बनाया नही क्या?"
और हाथ मे कागज लिए उसपर नजर डाली ,वो मृत्यु दाखले की ज़ेरॉक्स थी.मैं ने पूछा "ये मृत्यु दाखले की ही तो ज़ेरॉक्स है,ओरिजनल कहा है?" मेरे सवाल पर उसके अम्मा से पूछा तो अम्मा ने कहा "ओरिजनल कही गुम हो चुका है."
उसने मुझसे सवाल किया,"अब क्या करना पड़ेंगा?"
मैंने उसकी बूढ़ी अम्मासे कहा तुम घर चले जाओ, बच्चा कर लेगा सब."मैंने बच्चो कैसे करना है,सब तरीका बतलाया.वो नवजवान चला गया.
शाम को मेरे एक दोस्त खास मुझसे मिलने शॉप पर आये थे.वैसे भी मैं उनके आने के मकसद को जान ही गया था.केंद्र की भाजपा सरकार के नागरिकता संशोधन विधेयक याने सिटिजन अमेंडमेंट बील दोनों सदनो पास हुआ है.उस बारे में चर्चा कर मेरी राय जानने के लिए आये थे.साथ एनआरसी की बात हो रही थी.मैं अपने दोस्त को 'पोते को दादा नाम को जानता नही' इस वाक़ियात बो बता रहा था. उतने में सामने दादा के नाम न जाननेवाला नवजवान हमारे साथ आ बैठा.और एनआरसी में कैसे अक्सर सभी जाति धर्म के लोगोके पास कागज नही होते है,इस बात को गौर से सुनने लगा.समशान में जिस के सारी जिंदगी गुजरी वो हिन्दू म्हसनजोगी आजादी के बाद आज भी लोकबस्ती नही रहता है.सरकारी कागजात नही होनेकी वजह से आरक्षण में होने के बावजूद जाती का दाखला तो बहोत दूर की बात है,आजादी के ७२ साल बादभी बहोत लोगोंको रेशनकार्ड तक नही निकाल पाये.
भटकी की जाती को लोग कहते है,जहां गाव की हगनदारी,वही होती हैं, हमारी राहाईस रहनेके पाल होते हैं. जिनके पास जमीन है ना पक्के मकान ७/१२ पर नाम नही.ऐसे बहोत सारी जातियां भारत देश मे भाजपा की बातोमे हिंदू में गिनती होने के बावजूद सरकारी कागजात नही होने की वजह से एनआरसी के निकषमे पात्र नाही हो पायेगी.असम एनआरसी में १९००० में १४०००० जो हिंदू अपात्र पाए गए.जिस कारण अमित शाह परेशान हुए.क्योंके मुसलमान बहोत कम पाए गए.
हमारे देश मे बहोत सारे हिंदू ही या मुसलमान जिनके पास सरकारी कागजात की कमी है,बहोत सारे लोगके पास आज भी सरकारी कागज का साधा से भी चिट्ठा तक नही पाया जाता है.वजह गरीबी,बेरोजगारी, अकाल(दुष्काल),बाढ़ कई वजह से घरदार ,गाव छोड़ कर कई पीडिया गुजर चुकी है.बहोत लोगो के परदादा ,दादा कहाँ के थे,कहाँ अंतिम संस्कार हुए या कहा दफनाए गए यह भी पता नही.क्योंकि मेहनत और मजदूरी कर परिवार का पेट पालने में जिंदगी कैसे तैसे गुजरी.उसमे बड़े पैमाने में अशिक्षितता भी तो बहोत सारे घर मे मुकाम को थी.आज भी सक्ति के शिक्षण 2009 में कानून बनाने के बावजूद.आज भी जन्म दाखला न होने के बावजूद सलाबाह्य याने स्कूल न जाने वाले बच्चे बड़े पैमाने में पाए जाते है.बहोत सारी वजह है.
आज तो केंद्र में हो या राज्यमे कोई भी एमपी,एमएलए को सियासत में सिर्फ धर्म ही नजर आता,मैं मिसाल देता हू, गर तुम कीसीभी नेता के पास दारू दुकान के परमिट के लिए काम ले जाओ, वह तुम्हारे काम के लिए वक्त देंगा क्यो के उसमे कुछ कमीशन मिलेगा. मगर रोजगार के लिए रिक्षा परमिट के लिए जाओ, तो 'नेताजी घर मे नही है' कहकर भाग दिया जाता है.मगर जमीनी हकीकत किसीकोभी पता ही नही.अमित शाह को कुछ भी पता नही होंगा,ये मेरा दावा है.रही दलित पिछड़े जाती के नेताओ की बात.तो यहाँ सब कुछ बिकता है.मुसलमान लीडर और समाज का हाल भी यही है.इसलिए एनआरसी की कोई चिंता ना करो.बस अपना अपना काम करो,कमाओ और खाओ, अपना एआरसी के फिक्र में बीपी मत बढ़ाओ.हर व्यक्ति यही ठहरावो के मैं एनआरसी में अपने कागजात नही दूंगा.
मेरी बात सुन नवजवान हंस पड़ा और कहा,"अम्मा एनआरसी के डर से ही आयी थी.ओरिजनल मृत्यु पत्र गुम हो चुका है.डुप्लीकेट बनाना चाहती है."
बहोत सारे मुसलमान मुझसे एनआरसी के बारे में पूछा रहे थे और पूछ रहे है."क्या करने का अफजल भाई,कैसा कुछ समझ नही आ रहा ?" मेरा सभी से जवाब है. एनआरसी में किसीने अपना डॉक्युमेंट जमा करने के ही नही.ना सरकार के पैसे का नुकसान करवाने का,ना अपने रोजगार डुबाने का.क्योके रेशनकार्ड के कंप्यूटराजेशन के लिए पिछले कई सालोंसे कागज जमा के बार कर चुके है,आधार कार्ड के लिए खाना पीना छोड़ कतारमे के दिन खड़े रहकर,साथ कागजी दस्तावेज जमा कर बनवा चुके है.आज तक घर पर आने का इन्जार कर रहे है.न आने पर कंप्यूटर प्रिंट निकाल चुके है.उसके बाद कंप्यूटर में हुए नाम,जन्म तारीख,गलत पते की सजा दुरुस्ती करने में आज तक कई सालोंसे लगे हुए है.
जरासी काना मात्रा की गलती गरीब कीसीभी जाती की बहोत महिला डिलीवरी के सरकारी स्किम से लाभ उठा न सकी.बहोत सारे बीमार सरकारी योजनासे पीडित होने के बावजूद इलाज न पाने के कारण कई चल बसे तो कही आज भी पीड़ा सह रहे है.सरकार यह भी शासन निर्णय अजीब सा मालूम होता है.आधार कार्ड और रेशनकार्ड अनिवार्य याने जरूरी नही बतलाते है,हर योजना में आधारकार्ड के साथ रेशनकार्ड भी कम्पलसरी मांगता ही है.न देनेपर योजना से वंचित रखता है. पिछले कई सालोंसे कही बार हम हिन्दू मुसलमान कितने दस्तावेज जमाकर चुके है.सरकारी सर्वर बार बार डाउन होने के कारण आज तक कंप्यूटराइज्ड पूरी तरह कर न सके.क्या ये दोष आम भारतीय नागरिकोका है. आधारकार्ड लिंक कर चुके है.मोबाईल नंबर लिंक करवा लिए है.बहोत सारे दस्तावेज सरकार के पास जमा होने के बाद गर घुसपैठियों को ढूंडने के आम भारतीय नागरिक को तकलीफ देना कहा का न्याय है.
असम एनआरसी "खोदा पहाड़ निकला चूहा " सी साबित हुई है.सरकार का करोड़ो रुपैया जाया कर दिया गया है. साथ नागरिकता संशोधन विधेयक ने दो असामी भारतीय नागरिक का बली ले चुकी है.केंद्र सरकार की लोकप्रियता अब काम हो रही है. प्रधानमंत्री ने सारी दुनिया के दौरे कर तो लिए पर बे रोजगारी की समस्या हल कर नही पाए.कथनी कथनी ही बन कर राह गयी.याने कथनी को करनी में नही बदल पाए.जिस वजह से अब भारतीय नागरिक में नाराजी साफ झलक रही है.ये सब सियासत कर मुसलमानो के प्रति देशद्रोह की भावना निर्माण कर हिंदू वोट बैंक बनाने की कोशिश कर तो नही रहे?
हम सब भारतीय राष्ट्रवादी मुसलमान मिलकर तय करे.देश को नुकसान पहुचाये ऐसे कीसीभी सरकार की हरकत का जमकर विरोध करेंगे.पहले असम एनआरसी पर बहोत पैसा, मेहनत और वक्त खर्च बरबाद कर चुके है.गर सरकार देश भर गर एनआरसी लागू करे तो सभी देशभक्त भारतीय नागरिक, हिंदू हो या मुसलमान देशहित को ध्यान रखने हुए,देश को आर्थीक नुकसान से बचाने के लिए एनआरसी में कोई भी दस्तावेज जमा न कर देशभक्ति का प्रमाण सिद्ध करेंगे.
एक क्लिक पर आधारकार्ड का जब भारतीय नागरिक का बायो-डेटा आता है.फिर एनआरसी के लिए दस्तावेज क्यो दे.
जयहिंद.......
(अफजल सय्यद, राष्ट्रभक्त भारतीय मुसलमान)
bjsmindia@gmail.com


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