CAA गर प्रताड़ित विदेशी हिंदू, शिख,बौद्ध,पारसी जैन के लिए है,तो भारत में ही तमिलनाडू में 3000 प्रताड़ित हिन्दू दलितों का इस्लाम मे धर्मांतरण क्यो? दैनिक लोकमत पढ रहा था.तो एक ऐसी हेड लाईन पर रुकी,"तामिलनाडू में 3000 दलित करनेवाले धर्मांतरण." तामिल पुलिग़ल कच्ची संगठन के इलावेन्निल का कहना है, "हमारे जीवन को हिन्दू धर्म मे कुछ कीमत न हो फिर हम इस धर्म ने क्यों रहना चाहिए? हिंदू धर्मको हमारी फिक्र ना हो तो,हमे भी उस धर्मने रहने की इच्छा नही है!" इस खबर के लाईन को पढ़ने बहोत देर तक मैं अमित शाहके पाकिस्तान, अफगानिस्तान,बांग्लादेश के प्रताड़ित (सताये हुए) हिन्दू, सिख, पारसी,जैन,बौद्ध को नागरिकता दिलवाने के किए नागरी संशोधन अधिनियम याने CAA की जरूरत केलिए संसद के लोकसभा और राज्यसभा के तेवर भरे भाषण और टिवी इंटरव्यूज को याद करने लगा.अमित शाह ने कहा था के,"पाकिस्तान,अफगानिस्तान,बांग्लादेश में रहनेवाले अल्पसंख्यको पर धार्मिक रूप से अत्याचार हुए है.धार्मिक परिवर्तन करने दबाव बनाया जाता है.इस कारण कोई हिंदू, बौद्ध, शिख, पारसी,जैन धर्म के लोग शरणार्थी बन आये है ,तो उन्हें हम CAA के जरिये नागरिकता देंगे." तमिल पुलिग़ल कच्ची के इलावेन्नील जो भारतदेश के नागरिक होते हुए कह रहे है, हमे हिंदू धर्म मे रहनी की इच्छा नही. और न्यूज 18 के इंटरव्यूमें अमित शाह को अमिश देवगन ने सवाल पूछा था के मुसलमानो CAA में क्यों सामिल नही किया गया ? सवाल के जवाब देते हुए अमित शाहने अमिश देवगन से ही सवाल किया था,"इस्लामिक स्टेटस में मुसलमानों पर कोई धार्मिक प्रताड़ना करेंगा क्या?इसका धर्म परिवर्तन क्या करायेगा?फिर से इस्लाम मे कराएंगे क्या?स्वाभाविक तौरसे नही करा सकता." अमित शाह ने बिल्कुल सच ही कहा के मुस्लिम स्टेट मुसलमानो धर्म परिवर्तन फिर से क्या करायेगा.लेकीन अस्पृश्यता के कारण तीन हजार हिंदू दलित इस्लाम कबूल करनेकी बात भारत मे करते है कारण हिंदू दलितों के साथ हिंदू सवर्णोके साथ हो रही प्रताड़ना ही तो है ना! इस बात अमित शाह अब टीवी पर जा कर इस बात का खुलासा भी करे.कौनसा दबाव है हिंदू दलितों पर धर्मांतरण के लिए या ये अत्याचारित किस के सताये हुए है ये भी खुलकर बताये. खबर में साफतौर पर कहा गया है के तामिलनाडू राज्य के नाडूर गाँव के 3000 दलित नागरिकोने इस्लाम मे दाखल होने का फैसला लिया. ५जनवरी २०२० को इस्लाम कबूल करेंगे. नाडूर गाव के शिवसुब्रमन्यम ने अपने पडोसमें दलितों का घर न हो इसलिए बीचोबीच एक दीवार खड़ी करदी थी.दिवार बांधते वक्त कोई फिक्र नही की गयी थी.२दिसंबर २०१९ को बीच की दीवार गिरने की वजह से १७ दलितों की जान चली गयी. शिवसुब्रमन्यम की तुरंत रिहाई हो गयी.इस दुर्घटना के बारेमे आवाज उठानेवाले नेता को कारावास भेजा गया.सरकार और पुलिस को बारबार शिकायत के बाद नजरअंदाज किया गया .जिस कारण आसपड़ोस के दलितोंने कबुल ए इस्लाम का फैसला लिया. अमित शाह आप का ही बयान है.मुसलमानो के कई देश है.कोई भी मुसलमानोंको अपना लेंगा. हिन्दू के लिए सिर्फ भारत देश है,तो बाहर देश के प्रताड़ित हिंदू को हम शरण दें तो इसमें बुराई कट है? अमित शाह जी गैरो पे करम अपनो पे सितम ये कहा का न्याय है?जरा बताये तो जरा ? सभी भारतीयवासियो को सरकार की नियतो को समझने की जरीरत है. देश के सामने बेरोजगारी के मसले है, शिक्षण का व्यापारीकरण हो चुका है, देश की तरक्की रुक गयी है.आरोग्य के मसलेपर सरकार नाकाम हो चुकी है.नोट बंदी फंस गई है. सबका साथ सबका विकास पर सरकार सबका विस्वास खो चुकी है.मुसलमानोंको टारगेट कर अब सियासत नही की जा सकती.अब जनता समझ चुकी है.तामिलनाडू के दलित ना लव जिहाद के शिकार है, ना इनका जबरदस्ती धर्मांतरण किया जा रहा है. ना इनका किसी जिहादी संगठन से ताल्लुक है. फिर क्यो 3000 दलित इस्लाम अपना रहे है? तो तुलसीदास महाराज का किस्सा याद आया. गंगा किनारे स्नान के लिए तुलसीदास महाराज गए,सामने एक ब्राह्मण दलित व्यक्ति को मारपीट कर रहा था.महाराज ने जाकर ब्राह्मण से पूछा क्यो मारपीट कर रहे हो? ब्राम्हण बोला इस अछूत के मेरे स्नान करने के बाद पानी के छीटे उड़े.मुझे फिर स्नान करना पड़ेंगा. तुलसीदास महाराज मुस्कुराकर कहा जब गंगा और शूद्र भी भगवान के पाव से निकले है तो ये भेद कैसा?गंगा पवित्र और शूद्र मनुष्य अपवित्र. तुलसीदास महाराज की बात गर्व से हिंदू कहनेवाला समझ नही पाया.जिसके कारण दीवार के नीचे १७व्यक्ति की जान चली गयीं.अमित शाहको कोइ ख़बर पहुचाये तो जरा. देश के आजादी के ७२ सालो बाद भी आज हम सुनते है, घोड़ी पर शादी में दलित चढ़ने के बाद उसे सवर्णो व्दारा मारा जाता है.दलित महिलाओं को कई कारण से विवस्त्र कर मारा जाता है.मरे हुए जानवर की खाल निकालने पर भी समुदाय द्वारा पीटा जाता है.देश के वर्तमान राष्ट्रपति के मंदिर प्रवेश से रोका गया.कभी किसी मन्दिर राष्ट्रपति प्रवेश के बाद मंदिर को पवित्र किया गया.इस हिकीक़त से कोई इनकार नही कर सकता.फिर भी लोग संस्कृति की बात करते है तो ताज्जुब होता है. रही बात मुसलमान की "एक ही सफ में खड़े महामुदो अयाज ना कोई बंदा रहा ना कोई बंदा नवाज." आज हम सब हिंदू ,मुस्लिम, शिख,बौद्ध,जैन,ईसाई,एस सी,एस टी को साथ मिलकर देश की एकता को बनाये रखनी की जरूरत है,जातपात के नामपर सियासत करने वालों से देश कोbjsmindia@gmail.com

CAA गर प्रताड़ित विदेशी हिंदू, शिख,बौद्ध,पारसी जैन के लिए है,तो भारत में ही तमिलनाडू में 3000 प्रताड़ित हिन्दू दलितों का इस्लाम मे धर्मांतरण क्यो?

     दैनिक लोकमत पढ रहा था.तो एक ऐसी हेड लाईन पर रुकी,"तामिलनाडू में 3000 दलित करनेवाले धर्मांतरण." तामिल पुलिग़ल कच्ची संगठन के इलावेन्निल का कहना है,
"हमारे जीवन को हिन्दू धर्म मे कुछ कीमत न हो फिर हम इस धर्म ने क्यों रहना चाहिए? हिंदू धर्मको हमारी फिक्र ना हो तो,हमे भी उस धर्मने रहने की इच्छा नही है!"
         इस खबर के लाईन को पढ़ने बहोत देर तक मैं अमित शाहके पाकिस्तान, अफगानिस्तान,बांग्लादेश के प्रताड़ित (सताये हुए) हिन्दू, सिख, पारसी,जैन,बौद्ध को नागरिकता दिलवाने के किए नागरी संशोधन अधिनियम याने CAA की जरूरत केलिए संसद के लोकसभा और राज्यसभा के तेवर भरे भाषण और टिवी इंटरव्यूज को याद करने लगा.अमित शाह ने कहा था के,"पाकिस्तान,अफगानिस्तान,बांग्लादेश में रहनेवाले  अल्पसंख्यको पर धार्मिक रूप से अत्याचार हुए है.धार्मिक परिवर्तन करने दबाव बनाया जाता है.इस कारण कोई हिंदू, बौद्ध, शिख, पारसी,जैन धर्म के लोग शरणार्थी बन आये है ,तो उन्हें हम CAA के जरिये नागरिकता देंगे."
        तमिल पुलिग़ल कच्ची के इलावेन्नील जो भारतदेश के नागरिक होते हुए कह रहे है, हमे हिंदू धर्म मे रहनी की इच्छा नही. और न्यूज 18 के इंटरव्यूमें अमित शाह को अमिश देवगन ने सवाल पूछा था के मुसलमानो CAA में क्यों सामिल नही किया गया ? सवाल के जवाब देते हुए अमित शाहने अमिश देवगन से ही सवाल किया था,"इस्लामिक स्टेटस में मुसलमानों पर कोई धार्मिक प्रताड़ना करेंगा क्या?इसका धर्म परिवर्तन क्या करायेगा?फिर से इस्लाम मे कराएंगे क्या?स्वाभाविक तौरसे नही करा सकता."
         अमित शाह ने बिल्कुल सच ही कहा के मुस्लिम स्टेट मुसलमानो धर्म परिवर्तन फिर से क्या करायेगा.लेकीन अस्पृश्यता के कारण तीन हजार हिंदू दलित इस्लाम कबूल करनेकी बात भारत मे करते है कारण हिंदू दलितों के साथ हिंदू सवर्णोके साथ हो रही प्रताड़ना ही तो है ना! इस बात अमित शाह अब टीवी पर जा कर इस बात का खुलासा भी करे.कौनसा दबाव है हिंदू दलितों पर धर्मांतरण के लिए या ये अत्याचारित किस के सताये हुए है ये भी खुलकर बताये.
खबर में साफतौर पर कहा गया है के तामिलनाडू राज्य के नाडूर गाँव के 3000 दलित नागरिकोने इस्लाम मे दाखल होने का फैसला लिया. ५जनवरी २०२० को इस्लाम कबूल करेंगे.
नाडूर गाव के शिवसुब्रमन्यम ने अपने पडोसमें दलितों का घर न हो इसलिए बीचोबीच एक दीवार खड़ी करदी थी.दिवार बांधते वक्त कोई फिक्र नही की गयी थी.२दिसंबर २०१९ को  बीच की दीवार गिरने की  वजह से १७ दलितों की जान चली गयी.
     शिवसुब्रमन्यम की तुरंत रिहाई हो गयी.इस दुर्घटना के बारेमे आवाज उठानेवाले नेता को कारावास भेजा गया.सरकार और पुलिस को बारबार शिकायत के बाद नजरअंदाज किया गया .जिस कारण आसपड़ोस के दलितोंने कबुल ए इस्लाम का फैसला लिया. अमित शाह आप का ही बयान है.मुसलमानो के कई देश है.कोई भी मुसलमानोंको अपना लेंगा. हिन्दू के लिए सिर्फ भारत देश है,तो बाहर देश के प्रताड़ित हिंदू को हम शरण दें तो इसमें बुराई कट है? अमित शाह जी गैरो पे करम अपनो पे सितम ये कहा का न्याय है?जरा बताये तो जरा ?
      सभी भारतीयवासियो को सरकार की नियतो को समझने की जरीरत है. देश के सामने बेरोजगारी के मसले है, शिक्षण का व्यापारीकरण हो चुका है, देश की तरक्की रुक गयी है.आरोग्य के मसलेपर सरकार नाकाम हो चुकी है.नोट बंदी फंस गई है. सबका साथ सबका विकास पर सरकार सबका विस्वास खो चुकी है.मुसलमानोंको टारगेट कर अब सियासत नही की जा सकती.अब जनता समझ चुकी है.तामिलनाडू के दलित ना लव जिहाद के शिकार है, ना इनका जबरदस्ती धर्मांतरण किया जा रहा है. ना इनका किसी जिहादी संगठन से ताल्लुक है. फिर क्यो 3000 दलित इस्लाम अपना रहे है?
       तो तुलसीदास महाराज का किस्सा याद आया. गंगा किनारे स्नान के लिए तुलसीदास महाराज गए,सामने एक ब्राह्मण दलित व्यक्ति को मारपीट कर रहा था.महाराज ने जाकर ब्राह्मण से पूछा क्यो मारपीट कर रहे हो? ब्राम्हण बोला इस अछूत के मेरे स्नान करने के बाद पानी के छीटे उड़े.मुझे फिर स्नान करना पड़ेंगा. तुलसीदास महाराज  मुस्कुराकर कहा जब गंगा और शूद्र भी भगवान के पाव से निकले है तो ये भेद कैसा?गंगा पवित्र और शूद्र मनुष्य अपवित्र. तुलसीदास महाराज की बात गर्व से हिंदू कहनेवाला समझ नही पाया.जिसके कारण दीवार के नीचे १७व्यक्ति की जान चली गयीं.अमित शाहको कोइ ख़बर पहुचाये तो जरा.
देश के आजादी के ७२ सालो बाद भी आज हम सुनते है, घोड़ी पर शादी में दलित चढ़ने के बाद उसे सवर्णो व्दारा मारा जाता है.दलित महिलाओं को कई कारण से विवस्त्र कर मारा जाता है.मरे हुए जानवर की खाल निकालने पर भी समुदाय द्वारा पीटा जाता है.देश के वर्तमान राष्ट्रपति के मंदिर प्रवेश से रोका गया.कभी किसी मन्दिर राष्ट्रपति प्रवेश के बाद मंदिर को पवित्र किया गया.इस हिकीक़त से कोई इनकार नही कर सकता.फिर भी लोग संस्कृति की बात करते है तो ताज्जुब होता है.
     रही बात मुसलमान की "एक ही सफ में खड़े महामुदो
अयाज ना कोई बंदा रहा ना कोई बंदा नवाज."
आज हम सब हिंदू ,मुस्लिम, शिख,बौद्ध,जैन,ईसाई,एस सी,एस टी को साथ मिलकर देश की एकता को बनाये रखनी की जरूरत है,जातपात के नामपर सियासत करने वालों से देश को बचाना भी बहोत जरूरी है.

        सय्यद अफजल, अहमदनगर
       bjsmindia@gmail.com6

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