"डिमॉक्रेसी के व्हलुज को मुसलमान यूथ समझने लगा है" थैक्यू शाहीनबाग ! डेमोक्रेटिक लडाई हक है
"डिमॉक्रेसी के व्हलुज को मुसलमान यूथ समझने लगा है" थैक्यू शाहीनबाग ! डेमोक्रेटिक लडाई हक है
"आप देख रहे है,हम घर की जिम्मेदारी को छोड़कर सिर्फ एक कौम अपनी राईट्स के लिए यहाँ पर खड़े है" जब एक मुस्लिम युवती सुप्रीम कोर्ट ने शाहीनबाग आंदोलन के मध्यस्ता केलिए नियुक्त किये कमिटी में वकील संजय कौशल,के जोसेफ, साधना रामचंद्रन और वजाहत हबीबुल्लाह के सामने कहते हुए आनेवाले दिनोंमें अब मुसलमान यूथ डेमोक्रेसी के व्हॅल्यूज को समझ रहा है और उसके लिए शाहीनबाग में रास्ते पर उतरा है.यह मुसलमान समाज के लिए तरक्की के लिए अच्छा मेसेज (संदेश)है. मुस्लिम युवती आगे कहती है,"बात जब संविधान की हो,बात जब सेक्युलर व्हॅल्यूज को बचाने की हो,बात डेमोक्रेसी के बचाने की हो,बात जब भगतसिंह को बचाने की हो,बात गांधीजी के व्हॅल्यूज को बचानेकी हो,तो हमे सड़को पर आना पड़ेंगा तो हम आ गये है. हम उन व्हॅल्यूज को नही खत्म होने दे सकते." साथ ये सवाल भी किया ,गवर्मेंट हमारी बात सुने.हम बहोत परेशान है,बाय द वे ऑफ द वे वाला रूल नही चल सकता.डेमोक्रेसी में एक इंच भी पीछे नही हटेंगे ये बात हो रही,इसलिए मैंने बात सुरु की है." बात तो बहोत असरदार रही.
जब दूसरी युवती बात करने खडे रही और बोली,"हम शाहीनबाग में सेलिब्रेशन के लिए नही बैठे,केंद्रीयमंत्री ,यूपी का चीफ मिनिस्टर जब दिल्ली चुनाव मे भरी सभामें हमे गोलियां मारने की लैंग्वेज इस्तेमाल कर रहे है और लोग तालिया बजाते है.क्या मैं आतंकवादी हूँ, क्या हमारी डेमोक्रेसी इतनी कमजोर हो रही है. इन बातों को सुनकर वकील कमिटी के सदस्यों ने कहा ,"हम आपकी बात से हुए हैं!" इस के जवाब में मुस्लिम युवती ने कहा,"जो हाकात फेस करता है, तब दिलसे बात निकलती है,क्लासरूम से निकलती है, तो इसतरह की आवाज नही निकलती."
शाहीनबाग का जनआंदोलन की दो युवतीयों की बात सुनकर वकील कमिटी प्रभावित होना यह मुसलमान समाज केलिए पॉजिटिव मेसेज है. स्वतंत्र भारत का सबसे बड़े आंदोलन मुसलमान युवकों के दिलमें डेमोक्रेसी (लोकशाही,जमुरियत) पर यकीन मजबूत कर दिया.सुप्रीम कोर्ट कहता है, हर किसीको प्रदर्शन करने का अधिकार है.सरकार बात करे.,जब हम CAA, NRC, NPR के विरोध में भारतीय मुसलमान की बात का समर्थन आज की दैनिक लोकमत की बातमी को गौर से समझने की जरूरत है.
१मार्च २०१७ को मानखुर्दके शांतिनगर झोपड़पट्टी में रहनेवाले अब्बास लालमिया शेख और तीन लोगोको बांग्लादेशी होने के शक में अटक की गयीं थी.उनपर घुसपैठियों का खटला दाखिल किया गया.उनमे से डर के मारे एक शख्स फरार हो गया था.यह खटला अतिरिक्त महानगर दंडाधिकारी ए एच काशीकर की कोर्ट में चलाया गया.कोर्टने उन्हें भारतीय नागरिक होने का फैसला सुनाया.अब आधार कार्ड़, रेशनकार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस सरकार ने जारी करने के बावजूद इतने से नागरिकत्व सिद्ध नही हो सकता,जन्म सर्टिफिकेट, बोनाफाइड सर्टिफिकेट, डोमिसाइल ( वास्तव्य) सर्टिफिकेट, पासपोर्ट, वोटिंग कॉर्ड नागरिकत्व का सबूत बनते है.हमारे यहाँ कोईभी पुलिस एक्शन के बाद हमे अपनी बेगुनाही कोर्टसे साबित करनी पडती है. और नये CAA दुरुस्ती कानून से बहोत सारे मुसलमानोको यही खतरा मंडराते नजर आ रहा है.
सरकारने 2014 के पहले के हिन्दू,शिख,बौद्ध,पारसी,जैन, क्रिश्चन को खतरे से बाहर निकाल कर भारतीय नागरिकता तो दे दी,देखा है ना आपने भारतिय मुसलमानको भारतीय होने के बावजूद दो साल से ज्यादा सलाखों केपीछे गुजारने पड़े. क्या ये मुसलमान पर अन्याय नही था.प्रधानमंत्री यह तो कहते है,CAA नागरिकता देता हैं,किसीकी नागरिकता छिनता नही,आगे की ख़ामोशी ये कहती है,मुसलमानो गर तुम्हारी नागरिकता शक के घरोमे आयी तो कोर्टमे भारतीय नागरिकता सिद्ध करो.इसी कारण भारतीय मुसलमान अस्वस्थ है,हमने परदेशी नागरिक को भारतीय नागरिक बनाने को CAA दुरुस्ती की है. भारतीय मुसलमानो को किसीभी तरहकी नागरिकता सुरक्षा की गारंटी प्रधानमंत्री क्यो नही देना चाहते है ?एक इंच भी पीछे न हटने की भाषा से भारतीय मुसलमान परेशान है.
लेकिन अब खुशी इसबात की है,डेमोक्रेसी के व्हॅल्यूज भारतीय मुस्लिम यूथ समझने लगा हैं.सरकार जब तक पुख्ता भरोसा ना दे,हम को थामना नही.डेमोक्रेटिक लडाई हक की है.
Think about it......
अफजल सय्यद, अहमदनगर,महाराष्ट्र.
"आप देख रहे है,हम घर की जिम्मेदारी को छोड़कर सिर्फ एक कौम अपनी राईट्स के लिए यहाँ पर खड़े है" जब एक मुस्लिम युवती सुप्रीम कोर्ट ने शाहीनबाग आंदोलन के मध्यस्ता केलिए नियुक्त किये कमिटी में वकील संजय कौशल,के जोसेफ, साधना रामचंद्रन और वजाहत हबीबुल्लाह के सामने कहते हुए आनेवाले दिनोंमें अब मुसलमान यूथ डेमोक्रेसी के व्हॅल्यूज को समझ रहा है और उसके लिए शाहीनबाग में रास्ते पर उतरा है.यह मुसलमान समाज के लिए तरक्की के लिए अच्छा मेसेज (संदेश)है. मुस्लिम युवती आगे कहती है,"बात जब संविधान की हो,बात जब सेक्युलर व्हॅल्यूज को बचाने की हो,बात डेमोक्रेसी के बचाने की हो,बात जब भगतसिंह को बचाने की हो,बात गांधीजी के व्हॅल्यूज को बचानेकी हो,तो हमे सड़को पर आना पड़ेंगा तो हम आ गये है. हम उन व्हॅल्यूज को नही खत्म होने दे सकते." साथ ये सवाल भी किया ,गवर्मेंट हमारी बात सुने.हम बहोत परेशान है,बाय द वे ऑफ द वे वाला रूल नही चल सकता.डेमोक्रेसी में एक इंच भी पीछे नही हटेंगे ये बात हो रही,इसलिए मैंने बात सुरु की है." बात तो बहोत असरदार रही.
जब दूसरी युवती बात करने खडे रही और बोली,"हम शाहीनबाग में सेलिब्रेशन के लिए नही बैठे,केंद्रीयमंत्री ,यूपी का चीफ मिनिस्टर जब दिल्ली चुनाव मे भरी सभामें हमे गोलियां मारने की लैंग्वेज इस्तेमाल कर रहे है और लोग तालिया बजाते है.क्या मैं आतंकवादी हूँ, क्या हमारी डेमोक्रेसी इतनी कमजोर हो रही है. इन बातों को सुनकर वकील कमिटी के सदस्यों ने कहा ,"हम आपकी बात से हुए हैं!" इस के जवाब में मुस्लिम युवती ने कहा,"जो हाकात फेस करता है, तब दिलसे बात निकलती है,क्लासरूम से निकलती है, तो इसतरह की आवाज नही निकलती."
शाहीनबाग का जनआंदोलन की दो युवतीयों की बात सुनकर वकील कमिटी प्रभावित होना यह मुसलमान समाज केलिए पॉजिटिव मेसेज है. स्वतंत्र भारत का सबसे बड़े आंदोलन मुसलमान युवकों के दिलमें डेमोक्रेसी (लोकशाही,जमुरियत) पर यकीन मजबूत कर दिया.सुप्रीम कोर्ट कहता है, हर किसीको प्रदर्शन करने का अधिकार है.सरकार बात करे.,जब हम CAA, NRC, NPR के विरोध में भारतीय मुसलमान की बात का समर्थन आज की दैनिक लोकमत की बातमी को गौर से समझने की जरूरत है.
१मार्च २०१७ को मानखुर्दके शांतिनगर झोपड़पट्टी में रहनेवाले अब्बास लालमिया शेख और तीन लोगोको बांग्लादेशी होने के शक में अटक की गयीं थी.उनपर घुसपैठियों का खटला दाखिल किया गया.उनमे से डर के मारे एक शख्स फरार हो गया था.यह खटला अतिरिक्त महानगर दंडाधिकारी ए एच काशीकर की कोर्ट में चलाया गया.कोर्टने उन्हें भारतीय नागरिक होने का फैसला सुनाया.अब आधार कार्ड़, रेशनकार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस सरकार ने जारी करने के बावजूद इतने से नागरिकत्व सिद्ध नही हो सकता,जन्म सर्टिफिकेट, बोनाफाइड सर्टिफिकेट, डोमिसाइल ( वास्तव्य) सर्टिफिकेट, पासपोर्ट, वोटिंग कॉर्ड नागरिकत्व का सबूत बनते है.हमारे यहाँ कोईभी पुलिस एक्शन के बाद हमे अपनी बेगुनाही कोर्टसे साबित करनी पडती है. और नये CAA दुरुस्ती कानून से बहोत सारे मुसलमानोको यही खतरा मंडराते नजर आ रहा है.
सरकारने 2014 के पहले के हिन्दू,शिख,बौद्ध,पारसी,जैन, क्रिश्चन को खतरे से बाहर निकाल कर भारतीय नागरिकता तो दे दी,देखा है ना आपने भारतिय मुसलमानको भारतीय होने के बावजूद दो साल से ज्यादा सलाखों केपीछे गुजारने पड़े. क्या ये मुसलमान पर अन्याय नही था.प्रधानमंत्री यह तो कहते है,CAA नागरिकता देता हैं,किसीकी नागरिकता छिनता नही,आगे की ख़ामोशी ये कहती है,मुसलमानो गर तुम्हारी नागरिकता शक के घरोमे आयी तो कोर्टमे भारतीय नागरिकता सिद्ध करो.इसी कारण भारतीय मुसलमान अस्वस्थ है,हमने परदेशी नागरिक को भारतीय नागरिक बनाने को CAA दुरुस्ती की है. भारतीय मुसलमानो को किसीभी तरहकी नागरिकता सुरक्षा की गारंटी प्रधानमंत्री क्यो नही देना चाहते है ?एक इंच भी पीछे न हटने की भाषा से भारतीय मुसलमान परेशान है.
लेकिन अब खुशी इसबात की है,डेमोक्रेसी के व्हॅल्यूज भारतीय मुस्लिम यूथ समझने लगा हैं.सरकार जब तक पुख्ता भरोसा ना दे,हम को थामना नही.डेमोक्रेटिक लडाई हक की है.
Think about it......
अफजल सय्यद, अहमदनगर,महाराष्ट्र.


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