CAA,NCR, NPR जागृति जनआंदोलन के बाद क्या?
CAA,NCR, NPR जागृति जनआंदोलन के बाद क्या?
मैं भी मुँह में जबान रखता "हूँ,काश पूछे कि मुद्दा क्या है."लोकसभा चुनाव से पहले देश की राजनीति गरमाने लगी थी.जब भी चुनाव आते है,सारी राजनीति सिर्फ मुसलमानो के इर्दगिर्द घूमती रहती है.हमारे देश मे खासबात है के,भाजपा जैसी पार्टी मुस्लिम व्देष का झुटे इतिहास प्रचार कर सत्तामें है.मैं सोच में पड़ जाता हूँ .जब कही मैं रोड पर चौराहे पर किसी कारणसे खड़ा रहता हूँ, तो अक्सर रास्ता भटका या कोई नया मुसाफिर मुझको बड़े विश्वास और ऐतेबार के साथ पत्ता या रास्ता पूछता है.जिसकी खास वजह मेरे चेहरे पर दाढ़ी,सर पर गोल टोपी और इजार कमीज का पेहराव देखकर उसे यकीन हो जाता है के ,यह आदमी सही रास्ता या पत्ता बतायेगा.ये बात मैं इतने यकीन के साथ कर रहा हूँ. एक मिसाल है,एक रोज मैं कलेक्टर ऑफिस के पास खड़ा हुआ था.एक करीबन सत्तर के आस पास उमरवाला धोती कुर्ता,गांधी टोपी पहना बुजुर्ग मुझसे आकर पूछता है, भाई कलेक्टर कहाँ है?मैंने उसे सामने हाथ दिखाकर कहा,वो सामने है.उस बुजुर्ग ने फिर अगला सवाल कियाई के कलेक्टर कहाँ बैठता है.जो कि मैं जानता था कलेक्टर कहाँ बैठता है,मैंने काचवाली इमारत दिखाकर बुजुर्गसे कहा पहले मालेपर कलेक्टर बैठते है.बस इतनाही कहा,बुजुर्ग के जुबांसे से एक अनमोल बात निकली,"तुम्हारे लोगो मे आज भी सच्चाई और ईमानदारी बाकी है."
एक बुजुर्ग कहता है,तुम लोगोमे याने सब मुसलमानोमे आज भी ईमानदारी बाकी है और कल एक नौजवान जामिया मिलिया के मोर्चे पर बंदूक से गोलिया मारते हुए कहता है,मैं तुम्हे आजादी देता हूँ. एक हिंदू बुजुर्ग जिसने सत्तर साल की उर्म घरमें थोड़ी गुजारी थी!उसका यकीनन कई मुसलमानोंसे दोस्ताना रहा होंगा और उसके बातसे साफ जाहिर होता है के, मुझसे पहले जिस जिस मुसलमानसे ताल्लुक आया होंगा.सबके उसके साथके ताल्लुक अच्छे ही थे.और कल का जामिया मिलिया में गोली मारनेवाले नवजवान की हरकतसे पता चलता है, उस नवजवान जे जहनमें तेराचौदा साल की उर्ममें ही शायद मुस्लिमद्वेषका प्रचार प्रसार करनेवाले संघठन के प्रभावमें आ गया हो.अखलाक के हत्या के बाद दादरी के बुजुर्ग से के एक महिला पत्रकारने पूछने पर कहा था,"आज कल हमारे बच्चे बड़ी अजीब हरकते कर रहे है.न जाने कौन इन्हें द्वेष का पाठ पढ़ा रहा है.हिंदू मुसलमान हम आजभी सब एक दूसरे के सुख दुख में बराबर के शरीक रहते है.मगर अखलाक के हत्याने हमे शर्मसार कर दिया." हिंदू नवजवान के दिलमे मुस्लिमद्वेष यह बड़ी चिंता की बात है.
परेश वर्मा एक भाजपा का याने सत्ताधारी पक्ष का एमपी दिल्ली के प्रचारमे कहता है कि,"हम सत्तामें आनेपर एक घंटेमे शाहीन बाग खाली करा देंगे." और मजमा तालिया पिटता है.जब दिल्ली की पुलिस ही केंद्र सरकार याने गृहमंत्री अमितशाह के हाथ मे है .तब ये बेतुका बयान सिर्फ मुस्लिम द्वेषभावना नही तो और क्या?अनुराग कश्यप कहता है,देश के ग़द्दारोको कहता और भक्त मजमा से आवाज आती है,गोली मारो सालोको.ये द्वेष किसके लिए है.
CAA, NCR, NPR के विरोध में शाहीनबाग का जनआंदोलन लोकशाही तरीके चल रहा है.जिस के लिए सरकार तो कोई अपना प्रतिनिधि भेज बात कर निराकरण नही कर रही है.उलट दिल्ली चुनावों में भाजपाके नेता द्वेषपूर्ण भाषण कर लाभ उठाना चाहते है.चुनाव आयोगने दखल तो लीऔर परेश वर्मा और अनुराग कश्यप पर पाबंदी लगाई.मीडिया तो मानो कोर्टकी भूमिका निभाकर भारतीय मुस्लिम को मुजरिम ठहराही देता है.लोकशाही के मीडियाई अदालत में मुस्लिम प्रवक्ता मानो झूट ही बोलता है ये ठहराकर न्यूज एंकर इल्जाम पर इल्जाम लगाकर मुस्लिम प्रवक्ता को बोलने न देने या अपने समाज की बाजू न रखने देने की ठानकर ही बैठा रहता है.कहते है ना बार बार कही जानेवाली बात सच माने जाने लगती है.जब देश के प्रादेशिक हो या इलेक्ट्रॉनिक न्यूज चैनल पर जब हर रोज हर चैनल पर किसीना किसी बहाने मुस्लिमद्वेष की डिबेट होती है.एक दो मिसाल दे ही देता हूँ.
जैसे ए पी जे अबुल कलाम के जन्मदिन की भाजपा के २०१४में सांस्कृतिक मंत्री रह चुके महेश शर्मा बयान देते है,अबुल कलाम मुसलमान होते हुए भी देशभक्त थे.
नासिक में कुंभमेलेके पाणी को लेकर चर्चा होती है,चर्चा में सूखे की हालत को देखकर पाणी को किस तरह कम इस्तेमाल किया जाए बात पर बकरीद के कुर्बानी का कोई ताल्लुक न होने पर पर बात करते हिंदुत्ववादी संघठन के प्रवक्ता ने ले आयी.
ऐसे कई डिबेट रोज होते है.जिस कारण नवजवान के हाथमें बंदूक आयी ये सत्य और हकीकत है.अजब लगता है के अभिव्यक्ति स्वातंत्र के नाम पर मुसलमानो पर न्यूज एंकर संगीन इल्जामात लगा देते है और हिंदुत्ववादी लीडर को हीरो बताते है.
आज पिछले डेढ महीने के आसपास से CAA, NCR, NPR विरोध के लिए खासकर मुसलमानोंने भारतीय लोकतंत्र को समझते हुए लोकशाही मार्गसे भारतभर में बहोत बड़े पैमानेमे जनआंदोलन खड़े किये.इसे दबाने के लिए बहोत सारी कोशिशें भी की गई.लेकिन कोर्ट के फैसले से सरकार को खामोशी इख़्तेयार करनी पड़ी.जिसके वजह से शाहीनबाग आंदोलन अब भी जारी है.जब के भाजपा नेता और मिडियाने कई झुटे लांछन लगाये. ये हमारी जागरूकता पहली बार नजर आयी है.पर अफसोस इस बात का है के सब गर्दी बिना लीडर और बिना किसी लंबी नीतिकी है.ये आंदोलन कही ना कही रुकेगा.मगर बिना बातचीत, बिना किसी हल के बिना रुक जाए उसके बाद क्या? इस बात की फिक्र होती कही नजर नही आ रही है. जो साफ तौर पर 29 जनवरी के भारत बंद में नजर आया.आज जिसके दिल मे आया चार लोग इकठ्ठा किये और कर दिए ऐलान.लोग जम गए,फिर घर चले गए आगे का क्या?दानिशमंद (बुद्धिजीवी) लोग एक साथ बैठकर समाज केलिए कोई योजना बनाने के लिए क्यो नही चर्चा करते.इन्हें कोई खास दावत की जरूरत होती है क्या?हमारे दानिशमंद लोगको एक साथ बैठकर समाज के तरक्की के किए खास योजनाए और संरक्षण लिये सरकारको कानून बनाने के वास्ते सभी को एक साथ काम करने की जरूरत है.चलो हम सब मिलकर कदम बढ़ाते है.
भारतीय मुसलमान के फलाह बैबुदगी (डेवलपमेंट और सुरक्षा)के लिए मिलकर एक साथ बैठो तो जरा .....
एक अपीलकर्ता
अफ़ज़ल सय्यद,अहमदनगर,महाराष्ट्र.
8805816984 hu
एक बुजुर्ग कहता है,तुम लोगोमे याने सब मुसलमानोमे आज भी ईमानदारी बाकी है और कल एक नौजवान जामिया मिलिया के मोर्चे पर बंदूक से गोलिया मारते हुए कहता है,मैं तुम्हे आजादी देता हूँ. एक हिंदू बुजुर्ग जिसने सत्तर साल की उर्म घरमें थोड़ी गुजारी थी!उसका यकीनन कई मुसलमानोंसे दोस्ताना रहा होंगा और उसके बातसे साफ जाहिर होता है के, मुझसे पहले जिस जिस मुसलमानसे ताल्लुक आया होंगा.सबके उसके साथके ताल्लुक अच्छे ही थे.और कल का जामिया मिलिया में गोली मारनेवाले नवजवान की हरकतसे पता चलता है, उस नवजवान जे जहनमें तेराचौदा साल की उर्ममें ही शायद मुस्लिमद्वेषका प्रचार प्रसार करनेवाले संघठन के प्रभावमें आ गया हो.अखलाक के हत्या के बाद दादरी के बुजुर्ग से के एक महिला पत्रकारने पूछने पर कहा था,"आज कल हमारे बच्चे बड़ी अजीब हरकते कर रहे है.न जाने कौन इन्हें द्वेष का पाठ पढ़ा रहा है.हिंदू मुसलमान हम आजभी सब एक दूसरे के सुख दुख में बराबर के शरीक रहते है.मगर अखलाक के हत्याने हमे शर्मसार कर दिया." हिंदू नवजवान के दिलमे मुस्लिमद्वेष यह बड़ी चिंता की बात है.
परेश वर्मा एक भाजपा का याने सत्ताधारी पक्ष का एमपी दिल्ली के प्रचारमे कहता है कि,"हम सत्तामें आनेपर एक घंटेमे शाहीन बाग खाली करा देंगे." और मजमा तालिया पिटता है.जब दिल्ली की पुलिस ही केंद्र सरकार याने गृहमंत्री अमितशाह के हाथ मे है .तब ये बेतुका बयान सिर्फ मुस्लिम द्वेषभावना नही तो और क्या?अनुराग कश्यप कहता है,देश के ग़द्दारोको कहता और भक्त मजमा से आवाज आती है,गोली मारो सालोको.ये द्वेष किसके लिए है.
CAA, NCR, NPR के विरोध में शाहीनबाग का जनआंदोलन लोकशाही तरीके चल रहा है.जिस के लिए सरकार तो कोई अपना प्रतिनिधि भेज बात कर निराकरण नही कर रही है.उलट दिल्ली चुनावों में भाजपाके नेता द्वेषपूर्ण भाषण कर लाभ उठाना चाहते है.चुनाव आयोगने दखल तो लीऔर परेश वर्मा और अनुराग कश्यप पर पाबंदी लगाई.मीडिया तो मानो कोर्टकी भूमिका निभाकर भारतीय मुस्लिम को मुजरिम ठहराही देता है.लोकशाही के मीडियाई अदालत में मुस्लिम प्रवक्ता मानो झूट ही बोलता है ये ठहराकर न्यूज एंकर इल्जाम पर इल्जाम लगाकर मुस्लिम प्रवक्ता को बोलने न देने या अपने समाज की बाजू न रखने देने की ठानकर ही बैठा रहता है.कहते है ना बार बार कही जानेवाली बात सच माने जाने लगती है.जब देश के प्रादेशिक हो या इलेक्ट्रॉनिक न्यूज चैनल पर जब हर रोज हर चैनल पर किसीना किसी बहाने मुस्लिमद्वेष की डिबेट होती है.एक दो मिसाल दे ही देता हूँ.
जैसे ए पी जे अबुल कलाम के जन्मदिन की भाजपा के २०१४में सांस्कृतिक मंत्री रह चुके महेश शर्मा बयान देते है,अबुल कलाम मुसलमान होते हुए भी देशभक्त थे.
नासिक में कुंभमेलेके पाणी को लेकर चर्चा होती है,चर्चा में सूखे की हालत को देखकर पाणी को किस तरह कम इस्तेमाल किया जाए बात पर बकरीद के कुर्बानी का कोई ताल्लुक न होने पर पर बात करते हिंदुत्ववादी संघठन के प्रवक्ता ने ले आयी.
ऐसे कई डिबेट रोज होते है.जिस कारण नवजवान के हाथमें बंदूक आयी ये सत्य और हकीकत है.अजब लगता है के अभिव्यक्ति स्वातंत्र के नाम पर मुसलमानो पर न्यूज एंकर संगीन इल्जामात लगा देते है और हिंदुत्ववादी लीडर को हीरो बताते है.
आज पिछले डेढ महीने के आसपास से CAA, NCR, NPR विरोध के लिए खासकर मुसलमानोंने भारतीय लोकतंत्र को समझते हुए लोकशाही मार्गसे भारतभर में बहोत बड़े पैमानेमे जनआंदोलन खड़े किये.इसे दबाने के लिए बहोत सारी कोशिशें भी की गई.लेकिन कोर्ट के फैसले से सरकार को खामोशी इख़्तेयार करनी पड़ी.जिसके वजह से शाहीनबाग आंदोलन अब भी जारी है.जब के भाजपा नेता और मिडियाने कई झुटे लांछन लगाये. ये हमारी जागरूकता पहली बार नजर आयी है.पर अफसोस इस बात का है के सब गर्दी बिना लीडर और बिना किसी लंबी नीतिकी है.ये आंदोलन कही ना कही रुकेगा.मगर बिना बातचीत, बिना किसी हल के बिना रुक जाए उसके बाद क्या? इस बात की फिक्र होती कही नजर नही आ रही है. जो साफ तौर पर 29 जनवरी के भारत बंद में नजर आया.आज जिसके दिल मे आया चार लोग इकठ्ठा किये और कर दिए ऐलान.लोग जम गए,फिर घर चले गए आगे का क्या?दानिशमंद (बुद्धिजीवी) लोग एक साथ बैठकर समाज केलिए कोई योजना बनाने के लिए क्यो नही चर्चा करते.इन्हें कोई खास दावत की जरूरत होती है क्या?हमारे दानिशमंद लोगको एक साथ बैठकर समाज के तरक्की के किए खास योजनाए और संरक्षण लिये सरकारको कानून बनाने के वास्ते सभी को एक साथ काम करने की जरूरत है.चलो हम सब मिलकर कदम बढ़ाते है.
भारतीय मुसलमान के फलाह बैबुदगी (डेवलपमेंट और सुरक्षा)के लिए मिलकर एक साथ बैठो तो जरा .....
एक अपीलकर्ता
अफ़ज़ल सय्यद,अहमदनगर,महाराष्ट्र.
8805816984 hu



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