NPR ही NRC की पहली सीडी है !
सियासत में जो कुछ होता है,जो फैसले लिए जाते है,वह इतेफाक नही होता.उन फैसलो के पीछे सोंची समझी प्लानिंग होती ही है."अमेरिकाके साबिक (माजी) राष्ट्राअध्यक्ष फ्रैंकलिन रुझवेल्ट की बात को अमित शाह के १९नवंबर २०२० के राज्यसभा में NRC देशभर में लागू करवाने का आश्वासन दिया था.उसके बाद बारबार क्रोनोलॉजी को समझिए कई बार इलेक्ट्रॉनिक न्यूज चैनलों पर आंखे बड़ी बड़ी कर न्यूज एंकरों की तरफ देखते हुए कहा. जब देश के सभी मजहबी लोंगो के मिलकर CAA और NRC का जमकर विरोध किया तो प्रधानमंत्री मोदीजी को रामलीला मैदानमे आकर सभामे कहना पड़ा हम NRC लागू करने वाले ही नही.एक दिन बाद अमित शाह फिर न्यूज चैनल पर आकर कहते है. CAA नागरिकता देनेवाला कानून है, किसी भी भारतीय की नागरिकता छिननेवाला कानून नही है.किसीभी भारतीय मुसलमान को डरने की जरूर नही है.यह तो बांग्लादेशी,पाकिस्तानी मुसलमान घुसपैठियों के लिये बनवाया है.
फिलहाल NRC देशभर में लागू नही की जाएँगी.NPR याने राष्ट्रीय लोकसंख्या नोंदणी की जाएगी.इसके बाद यह शक होता है के इन सब फैसलों के पीछे सोंची समझी साजिश तो नही ! और हम जब क्रोनोलॉजी समझते है.CAA कानून के बाद का क्रम NPR , NRC जैसे पीढ़ी दर पीढ़ी इस देश मे रहनेवाले नागरिकोका देश उनसे छीनती हुई नजर आती है.यह तो मुसलमानो के साथ सभी मजहब तके किए तकलीफ देने वाली है.
NPR यह NRC की पहली सीडी है. जैसा के हम जानते है, फिलहाल NRC देशव्यापी नही है.NPR और NCR कर संबंध को समझने की कोशिश करते है.
१)NCR याने राष्ट्रीय नागरिक नोंदणी यह सभी भारतीय नागरिकोंको सूची है,वो बनवाना नागरिकत्व कानून१९५५ के२००३ के दुरुस्तीनुसार आवश्यक है. इस कानून का मकसद भारतीय नागरिकोकि कानून के हिसाब से नोंदणी रखना है और बेकायदे से रहने वाले घुसपैठियों खोजकर उन्हें वापस भेजना है. असम में अंमलबजावणी इससे पहले सुरु हो चुकी है.देशभरमे २०२१ तक लागू करवानेकी योजना है.
२)भाजपाने २०१९ के जाहिरनामेमे देशभरमे NRC लागू करनेके आश्वासन है.१९ नवंबर २०१९ को गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभामें देशभर NRC लागू करवाने के आश्वासन दिया था.
३)नागरिकता अधिनियम २००३ नुसार केंद्र सरकार NPR याने राष्ट्रीय लोकसंख्या नोंदणी तैयार कर निष्पन्न हुए हुए मालूमात के आधारपर NRC लागू करवाने की तरतूद की हुई है.नागरिकत्व कानून २००३ के दुरुस्तीनुसार स्थानीय प्राधिकारी किसी व्यक्तिको NPR से NRC नोंद करवाये या न करवाने का निर्णय ले सकते है.नागरिक नोंदणी में नाम हो या न हो इसका निर्णय इसपर नागरिकत्व ठहराया जाता है.नागरिकत्व दुरुस्त कानून २००३के अनुसार नागरिकत्व का नून १९५५ में कलम १४अ को जोड़ा गया है. जिनमें राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी करनेकी तरतूद है.इस तरह नागरिकत्व( नोंदणी व पहचान पत्र)अधिनियम २००३ में भारतीय नागरिकोकी राष्ट्रीय सूची तैयार करवानेकी तरतूद है.उस वजहसे संपूर्ण भारतभर में लागू करने के लिए और किसी नये कानून की जरूरत नही.
४) केंद्रीय गृहमंत्रालयने दिसंबर २०१८ में स्पष्ट किया है कि नागरिकत्व कायदा १९५५ मे NPR औऱ नागरिकोंको राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी कारवानिकी तरदूद है. ईसी तरह कायदे अनुसार कायदे में नागरिकत्व अधिनियम२००३ में ही NRC करवाने की प्रक्रिया पूरी तरह स्पष्ट की गयी है.
५) १८ जून २०१४ में पूर्व गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने NPR की तारकुक परिणिती NCR में प्रक्रिया की जा चुकी है.२६ नवंबर २०१४ को केंद्रीयमंत्री किरण रिजिजू के जरिए राज्यसभा में कहा गया था कि NPR यह NCR की पहली सीडी है.
६) ३१ जुलाई २०१९ को NPR की प्रक्रिया सुरु करवानेकी अधिसूचना जारी की गयी है.१एप्रिल से ३० सितंबर २०२० के कार्यक्रम दिया गया है.२४ दिसंबर२०१९ को केंद्रीय मंत्री मंडल व्दारा रु.३,९४१ करोड़ खर्च के लिए मंजूरी दी है.देशभरमे NRC लागू करवानेकी पहली शिडी है.
हिंदू मुस्लिम राजनीति के कारण देशके उन्नती के पहिये दल दल मे फंसे हुए है.राजनीति को धार्मिक मतमतान्तर दूर रखना चाहिए.सरकार के इरादे नेक नही मालूम होते है हम गर क्रोनोलॉजी को समझे तो,अब भारतीय मुसलमानो को खासकर तकलीफ हो सकती है.क्योंकि गली से लेकर दिल्ली तक के समाज के न्याय हक लिए लढने वाले लीडर की खामी और कमी...
अक्सर मुसलमानोंको उर्दू पढ़ते आती नही,अंग्रेजी समझती नही और देवनागरी मे लिखते आता नही.किसीने गर समझाने की कोशिश की तो किसीकी सुनते नही. कुछ सोंचो तो...
एक इल्तेजा अपनो केलिए
अफज़ल सय्यद, अहमदनगर,महाराष्ट्र.


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