भारतीय मुसलमानो ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है ?
भारतीय मुसलमानो ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है ?
हेट न्यूज फैलानेवाले मीडिया से सवाल...
आज सुबह न्यूज देख रहा था.रशिया के जिस डॉक्टर ने रशिया के अध्यक्ष पुतीन को कोरोना की इम्फार्मेशन दी उसे ही कोरोना की लागत हुई है.इटाली,स्पेन,फ्रांस, जर्मन,चीन,ईरान, अमेरिका जैसे कई देशों में कोरोना जैसी बीमारी क्या मुसलमानो की वजहसे फैल रही है.दुनियाके किसी भी मीडिया ने अब तक नही दिखाई.लेकिन हमारे देश ने विपदा याने मुष्किल कोई भी और कैसी हो हर हालात में मुसलमान ही जिम्मेदार कैसे है, सारे झुटे इल्जाम लगाने में हमारे मीडिया को महारत हासिल है.पिछले दो रोज से मीडिया ने तबलीग जमात को इल्जामात के कठघरे में खड़ा कर दिया है. करोना जिहाद, करोना फैलाने की सुनियोजित साजिश के तहत कई झुटे इल्जामात लगाए जा रहे है.मुझे आज मेरे दोस्त मास्टर ने बताई बात याद आयी हमारे एक दोस्त की तबियत दिल का दौरे की वजह से बहोत खराब होने की वजह से ICU में अस्पताल एडमिट किया गया था.मास्टर साथ अस्पताल गए हुए थे.डॉक्टर अपना काम कर रहे थे.मास्टर एक कुर्सी पर बैठे हुए थे.वैसे भी जब डॉक्टर सीरियस मरीज को अपने ताबे ले लेते है तो,मरीज के रिश्तेदारों को कोई काम नही रहता. सिवाय मरीज के तंदरुसती के लिए दुआ माँगने, या जब दवा की जरूरत मरीज को पड़े तो चिठ्ठी लेकर दवाइयां ला देना.
कुछ डॉक्टर अब थोड़ीसी फुरसत में बैठे हुए थे.२०१९ के लोकसभा चुनाव के नतीजे खत्म हो चुके थे.दो डॉक्टरो में चर्चा चल रही थी.एक डॉक्टर ने दूसरे से कहने लगा,"अब के बाद किसीको वोटिंग नही करूँगा" सफाई में वोटिंग नतीजे से नाराजगी पेश कर चुका था.२०१४ में जिस उम्मीद से सरकार को चुना था.उस पर सरकार कामयाब नही उत्तरी.दूसरे डॉक्टर चर्चा में अपनी बात बड़ी अजीब कही,"अब किसीभी इलेक्शन में हमे अपनी हैसियत के हिसाब से वोटकी कीमत ठहरानी पडेंगी". मास्टर उनकी बात सुनकर मुस्कुरा रहे थे.उन्होंने मास्टर को चर्चा में लाना चाहा,मास्टर से कहा " सही बोला ना!" मास्टर ने कहा "दोनो ही बात गलत है.वैसे तो मुझको दखल देने की जरूरत है.लेकिन आपकी मायूसी देश के लोकशाही को कमजोर कर सकती है."
एक महिला डॉक्टर भी चर्चा में शामिल हो गयी थी.बात ने करवट बदली, अब मीडिया पर बात होने लगी, तो महिला डॉक्टर जिसकी उर्म लगभग २७ या २८ साल की होंगी. वो कहने लगी,"आजकल मैंने न्यूज देखना ही छोड़ दिया है.जब देखो हिंदू मुस्लिम में नफरते फैलाने वाली बहस के अलावा कुछ और दिखाने के लायक मीडियामे कुछ होता ही नही." न्यूज न देखने की बात की सफाई में महिला डॉक्टर जो कहा, हम सब के लिए एक बेहतरीन सबक है.कहने लगी,"हम पेशे से डॉक्टर हैं.हमारा काम है,मरीजो को तंदुरुस्त करना.हालात के हिसाब से हमे ऑपरेशन भी करना पड़ता है.हर जातपात के मरीज हमारे अस्पताल में इस भरोसे आते है के वो हमारे यहां आकर ठीक हो जाएंगे.किसी जात को देखकर आते नही.मैं जात से हिंदू हुँ, कई मुस्लिम माँ बहाने कही बाहर मिलती है, तो बड़ी रिस्पेक्ट के साथ मुझसे मिलती है.मेरे से उम्र में बड़ी होती है. जब मैं ये इज्जत पाती हैं. जब कभी न्यूज चैनल्स की हिन्दू मुस्लिम नफरत भरी बहस से कई लोगोकी दिलोमे नफरते पैदा हो सकती है.इंसानी फ़ितरते है.अपने आप को गलत मानता ही नही. दूसरो को ही गलत ही कहता है.मुझे कई ऑपरेशन करने होते है,मुझपर न्यूज चॅनेल असर ना करें. इसलिये मैंने न्यूज चॅनेल देखना ही छोड़ दिया.मुझसे कुछ मिडिया के असर से गलत हो जाये तो लोगो का इंसानियत से भरोसा डॉक्टर पेशे से उठ जाएंगे"
न्यूज चैनल्स ने पिछले दो दिन से निजामुद्दीन तबलीग जमात के मरकज में रुके लोगों के बारेमे नफरतो भारी बहस सुरु कर दी है. हमारे देश की मीडिया कैसे कोर्ट बन मुसलमानो को मुजरिम तय कर देती है.ऐसी २०१४ के बाद से आजतक हर दिन होता है. मुझे एक बहस याद है.पानी की बड़ी किल्लत महाराष्ट्र में चल रही थी.नासिक में कुंभमेला होना था.प्रोफेसर देसरडा ने हाई कोर्ट में पाणी की किल्लत को और अकाल सी हालात को जानकर रिट दर्ज की थी.कोर्ट ने सरकार को पाणी के इस्तेमाल के लिए कुछ निर्दश दिये थे.अब बताए इसमें मुसलमान को कोई किरदार है, मुसलमान का कोई विरोध है ?नही ना. बहस चल रही न्यूज चॅनेल पर, बीचमें एक वक्ता ने वक डाला. बकरीद में मुसलमान बहोत पाणी इस्तेमाल करते है, उसका क्या?
है ना बे वजह की बकवास.ऐसी ही बकवास और मुस्लिद्वेष की बहस की मीडिया को रोज आदत सी पडी है.मुस्लिमद्वेष का एडिक्ट हो चुका है भारतीय मीडिया.
देश की हर न्यूज हर बहस मुस्लिमद्वेषपूर्ण कैसी बने यही कोशिश में रहता है.निजामुद्दीन मरकज में रुके हुए विदेशी नागरिक को छुपे बताया.जब के भारत मे आनेके लिए भारत सरकारने ही वीजा दिया था. जिसकी इम्फार्मेशन सरकार के पास लिखित होती है .मरकज में कौन रुके क्यो रुके इसकी बाकायदा लिखित इम्फार्मेशन जिम्मेदार के पास होती है. तबलीग जमात एक इंटरनेशनल ख्यातिप्राप्त संगठन है.सरकार को सारी इम्फार्मेशन दे चुकी हैं और जरूरत पढने पर दे सकती है.
तबलीग जमात के कार्य को मुझ जैसा शख्स शब्दों में बयान नही कर सकता.बहोत बडा ऐतिहासिक काम और बड़ी जमात है.देश मे अमन और शांति केलिए बहोत बडी भूमिका अनदेखी नही की जा सकती.हम इनकी भूमिका देखे १)ईमान २) नमाज ३) इल्म (शिक्षण) व जिक्र (स्मरण) ४) इकराम (मान सन्मान) ५) इखलास (तन मनाने) ६) दावत व तबलीग (प्रचार व प्रसार) करते है.क्या ऐसी संघटन गैर जिम्मेदाराना हरकत जानबूझकर कर ही नही सकती है. इस की गवाही भारत सरकार भी दे सकती हूं.क्यो के सरकार के गुप्तहेर डिपार्टमेंट के पास देश के आजादी से लेकर आजतक का रिपोर्ट लेखी तौर पर मौजूद है.मीडिया भी जान ले. आज देश के हालात में सभी जाती धर्म को एक साथ रहकर लढना है.फिर क्यो बात को न समझकर, द्वेष भावना मुस्लिम समाज को लेकर ही पिछले कई सालों से क्यो मीडिया फैलाती है. औए ये कबतक?यह मेरा मुस्लिम हेट न्यूज फैलानेवाले रिपोर्टर और मीडिया से सवाल है?
अफज़ल सय्यद, अहमदनगर,महाराष्ट्र.



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