प्रधानमंत्री खामोश क्यो रहते है?
प्रधानमंत्री खामोश क्यो रहते है?
क्या सही कोरोना महामारी तबलीग़ जमात जिम्मेदार है?
लॉक आउट से और तबलिक जमात पर लगाये जानेवाले मनघडंत झुटे मीडिया और सोशल मीडियाके इल्जामात से मैं परेशान हो गया हूँ.चलो अब किताबो पर नजर डालते है.,यह सोचकर किताबो को तलाशना सुरु किया.मेरी घर पिछवाडे में बाहर खेलते हुए बच्चो का शोर सुनाई दे रहा था. मैंने थोड़ा सा पीछे हटकर बाहर की तरफ झांका. दो मासूम बच्चे खिड़की में बॉल खेल रहे थे.एक बच्चा मुसलमान का था और एक हिंदू का था.दोने के घर पड़ोस में थे.उनकी मासूमियत को देखकर मैं अपने आप मुस्कुराया.बच्चो को मीडियामे बतलाये जानेवाली ना कोरोना महामारी की खबर थी ना निजामुद्दीन मरकज पर लगाये जानेवाली इल्जामात की खबर से कोई लेना देना था.किताब की तलाश इसलिए के एक जगह किताबो को रुकने की आदत नही ,जो मालिक के हुक्म की तामीर (आदेश पालन) पालन तो करती है.जहाँ जैसे भी हालत में रखे रुक जाती है.लेकिन घरवाली के साफसफाई में उसीके इच्छा नुसार जहा कई जगह मिले उसी के मुलाबिक बिना किसी शिकायत ठहर जाती है.तो मुझमो तलाश तो करनी होगी.टेबल पर राखी एक बैग की तलाशी तो लेखक लाला काशीराम चावला की इस्लाम नामी किताब हाथ लगी.मैंने किताब के कुछ पन्ने छाने, लेखक अपने परिचय पन्ने पर रुकी वो लिखते है,
"मैं मुसलमान नही हूँ .परंतु इस बात का विश्वास दिलाता हुँ कि मैं इस्लाम धर्म का प्रशंसक हूँ. अब भी वो कुरान की आयतें जिन्होंने मेरे दिल को प्रभावित किया हैं, मैं पढाता रहता हूँ.रसूले करीम (स.अ.)के जीवन को अपने जीवनी में पथ प्रदर्शक समझते है"
लाला काशीराम अंग्रेजी शासन कालमें डिप्टी कमीशनर लुधियाना के कार्यालय में सुपरिडेंट थे.अपनी किताबमें लिखते कि, इस्लाम की इंसानको कुरान में दर्स (शिकवण)देता है.
"ऐ नबी! ईमानवाले पुरुषोसे कहो कि अपनी निगाह नीची रखे और अपने गुप्तांगों (शर्मगाह) की रक्षा करे. यह उनके लिए अधिक शुद्धता की बात है.निसंदेह अल्लाह उसकी खबर रखता है जो कुछ वो करते है."
एन एम रॉय की किताब में वो लिखते है,दुनिया का सबसे बेहतरिन मजहब इस्लाम लिखते है.जो जाती के ब्राहण है.ऐसी कई हिंदू धर्म के संतो ने,लेखकोने, राजनेताओं ने,राष्ट्रीय आंतर राष्ट्रीय नेताओ ने इस्लाम की अच्छाई को बयान किया.साथ साथ इस्लाम को अच्छी तरह समझकर बड़ी मात्रामे इस्लाम कबूल कर लिया.मैं अब गहरी सोंच मे पड गया.बच्चोकी मासुमियत, इस्लाम मे बारे में लाला काशीनाथ जिन्होंने रोशनी डालते हुए इस्लाम की पवित्र कमाई,न्यायप्रियता, क्षमाशीलता, पड़ोसीके अधिकार,शांती, सामाजिक बंधुता,एक ईश्वर की महत्ता को लिखा है.उसे गहराई से पढ़ने के बाद फिर एक बार न्यूज मीडिया और सोशल मीडिया पर नजर डाली.तो नफरत भरे बयान कुछ कम दिखाई नही दे रहे है.
तबलीग जमात जो मुस्लिम धर्म प्रचार और प्रसार का काम कई दशकों से करती हैं. जिसपर आज तक कोई भी समाजविघाटक कार्य का इल्जाम नही है.भारतीय गुप्तहेर संगठन ने शांत और अमनवाली बतलाया है.बालासाहेब ठाकरेजी ने अपने हयाती में मुम्बई में इज्तेमा के लिए मैदान के परवाना केलिए मदत की थी.आज जमात को नफरत फैलाने का काम किया जा रहा है.सारे करोनाग्रस्त हालत के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है.महाराष्ट्र राज्य के हर जिले में होनेवाले इज्तेमा लॉक डाउन के पहले ही तबलीग जमातने रद्द कर दीये गये थे.ये दखल न्यूज मिडियाने नही ली.तो सारे इल्जाम बे बुनियाद और झुटे है.पोलिस पर थूकने और नर्सेस को शर्म सार करने वाली हरकत ये बेबुनियाद और झूटी है.
;बार बार गर कोई झुठ बोला जाये,तो वो सच लगने लगती है.गोदी मीडिया और भक्त भारतीय मुसलमानो के खिलाफ बार झुटे इल्जाम लगाकर भारतीय समाज को सच क्या और झूट क्या ये जानने से पहले भ्रम फैलाकर उलझन में डाल देते है.जिस का परिणाम बहोत लोग अब उनकी झूटी बातों को सच मानकर मुसलमानो की तरफ हीन नजर से देखने लगे है.जब हम नर्सेस को शर्मसार करनेवाले झुटे इल्जाम का खंडन करते हैं. मजहब इस्लाम में पुरुषोंको अपनी निगाह नीची रखने और अपने गुप्तांगों की रक्षा करने का हुक्म देता है.और तबलीग जमात समेत सभी जमाते कुरान और हदीस रसूले करीम (स.अ.) की जीवनी शिखाई जाती थी.तो ये मुमकिन नही के तबलीग जमात का कोई शख्स कोई गलत काम करे.
मीडियावालों से पूछा गया कोई क्लीप दे.कोई गुन्हा दर्ज क्यो नही किया?सवाल का जवाब कोई नही दे पा रहा हूं.सिर्फ झुटे करोना जिहाद जैसे इल्जामात रटे जा रहे थे.झूटी पुराने वीडियो फर्जी क्लिप चलाई जा रही है.अब जमीनी हकीकत को भी जानना जरूर है, सबसे पहले १३ मार्च २०२० को सरकार ही बताती हैं, हेल्थ इमर्जेंसी देश मे नही.तो जमात का इज्तेमा गैरकानूनी नही है.भारत के विभिन्न राज्यो में होनेवाले इज्तेमा तबलीग जमातने निजामुद्दीन मरकज के इजाजत से ही रद्द कर दिए थे. तो क्या वो निजामुद्दीन मरकज में कैसे हो सकता. यह बात कोई जमात के जिम्मेदार प्रेस नोट के जरिये क्यो नही कहते है.वैसे १५ मार्च के बाद सभी अपने घर लौटने लगे थे.लॉक डाउन बिना पूर्वनियोजन की घोषित की गयी.अब मरकज के जिम्मेदार ने सरकार से घर जाने में बचे हुए को घर भेजने की गाड़ियों की परमिशन मांगी थी.
प्रधानमंत्री और दिल्लीके मुख्यमंत्री के अपनी जगह रुकने कर रहे थे.प्रशासनिक यंत्रणा खामोश हो गयी. अजित डोवाल से बात होती है.मौलाना साद पुरी तरह से मदत करने की बात करते है.और चेकिंग का काम सुरु होता है.और मीडिया इल्जामात मरकज के जिम्मेदार को लगाकर देश के करोना ग्रस्त हालात के गुनाहगार ठहराया.
हकीकत को जानते हुए प्रधानमंत्री खामोश क्यो है?
क्या सही कोरोना महामारी तबलीग़ जमात जिम्मेदार है?
तो हालात को सही जाने तो जवाब नही,नही नही,
अब तो मूसलमान का छींकना,रोना,हँसना हर हरकत पर मीडिया इल्जाम क्यों लगती है ? लगता बिकता है !
मुसलमानो 'लाला काशीराम चावला' आजादी से पहले इस्लाम को बेहतरीन तरीकेसे समझे,भले ईमान ना ले आये,मगर अपनी जिंदगी उन्ही के नक्शे कदम पर गुजारी है.इस बात को कबूल भी करते है.फिर क्या हो रहा है आजकल के नफरते मुस्लिमा क्यो? गहराई से सोंचे हमारी लापरवाही हैं या हमारे खिलाफ साजिश.साजिश को रोकने और लापरवाही से हरकत आने हुस्ने अखलाक की हम सब को जरूरत.
अफज़ल सय्यद, अहमदनगर, महाराष्ट्र.



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