हजारो सालो से एक दूसरे के सुखों दुखो मे होते है सामिल, फिर भी देश मे सब धर्म खतरेमे क्यो?हकीकत कुछ और है या पोलिटिकल पॉल्युशन ?.....
हजारो सालो से एक दूसरे के सुखों दुखो मे होते है सामिल, फिर भी देश मे सब धर्म खतरेमे क्यो?हकीकत कुछ और है या पोलिटिकल पोल्युशन ?.....
दो चार रोज पहले.भारत भर में खुशियों के साथ दिवाली मनाई गई.महंगाई,मंदी जैसी दीगर बाते गर छोड़ दे तो कह सकते है, ठीक ठाक ही है.हम रहते है,उस बस्ती का नाम मुकुंदनगर,वह मुस्लिम बहुल बस्ती है.जिस शहर में रहते है.शहर का नाम अहमदनगर.जहाँ नॉन मुस्लिमोकी आबादी बड़ी संख्या में है.शहर के नाम बदले के बात कभी कबार आकर हवा में खामोश हो जाती है.हमारे मोहल्लेमें दो ही नॉन मुस्लिम रहते है.जिनमे एक ईसाई और हमारे पड़ोस में ही हिन्दू परिवार रहता है.कल सुबह में पड़ोसी वहिनी की मझली बहुने दिवाली की मिठाईया लाकर दी.मैंने उसे कहा,"मैने कल ही याद किया था के,"अब तक वाहिनी ने यहाँसे मिठाईया आयी नाही." मेरा लड़का मेरी तरफ देखने लगा और कहने लगा "ये क्या है." हर साल पड़ोसी वाहिनी के घर से मिठाईया की थाली आती है.
जब रमजान का महीना होता है.हमारे आस पड़ोस के मुसलमानो के घर रोजे के इफ्तारी के लिए फलफ्रूट और समोसे भजिए जैसे तले हुए चीजो की भरी थालिया भेजी जाती है.मकसद रोजदार को खिलाना सवाब (पुण्य)का काम है.और हर घर मे बच्चे ही बड़े खुशीसे रोजदार के लिए घर घर थाली पहुँचाने का काम करते है.बच्चों को फल और तली हुई चीजें ज्यादा पसंद होती है.और हर घर मे बच्चे होते है.इसीलिए जब फलों की थाली लिए जब हमारे घर से बच्चे निकलते है,मेरी सख्त ताकीद होती है घरवालोसे के,पहली थाली पड़ोस के नॉन मुस्लिम(हिन्दू)परिवार के घर जाए.क्यो के उनके घर मे भी बच्चे है और वो सभी मोहल्ले के बच्चो के साथ खेलते कूदते है.एक दूसरे के सहेलियां और दोस्त है.
मुस्लिम मोहल्ले में भेदभाव दिखाई नही देता ऐसी बात नही है.हिंदू मोहल्ले में भी रहने वालों से भी भेदभाव दिखाई नही देता.मैं पिंपरी चिंचवड़ में काटे पिम्पले इलाके में काटे आडनाम (सरनेम) के परिवार ज्यादा थे.उन्ही के किराए से लिए घर मे तकरीबन ३साल से ज्यादा रहा था.किसी भी छोटे से छोटे फक्शन से लेकर बड़े फंक्शन हो या त्योहार बिना मेरे परिवार को छोड़कर मानते ही नही थे.
हमने देखा के हमारे मोहल्ले में उन नॉन मुस्लिम के घर जब कोई चल बसने पर हमारा पूरा मोहल्ला आ खड़ा होता है और उनके दुख को अपना मानकर हर बूढा ही या नावजवान भागदौड़ करता नजर आया था और आता है.सड़क पर कोई हादसा (एक्सीडेंट)घर गिरने पर,आग लगनेपर, सड़क मोटर दुर्घटना पर,बिल्डिंग के छतसे गिरने पर,चक्कर आकर रास्तेमें गिरनेपर,कोई भी कुदरती आफत हो जाए तो हर कोई जाति जाने बिना मदत की इंसानियत के नाते पहुंच कर हर तरह की मदत करता है.खासकर बहोत ही घायल होतो उसकी जान बचाने के लिए बिना जान पहचान अपने जिस्म का खून भी दे देता है.
वही आज कल धर्म के नाम पर हादसों में मोब्लिंचिंग के नाम पर नाम धर्म देखकर जान से मार दिया जाता है.मीडिया और सोशल मिडिया पर इसे चावसे चगलाय जाता है.जब हम वजह जानते है.तो कही मुल्क का चुनाव होता है या प्रदेश का.
मेरे दुकान के बाजू में दुकान मेरे जातवाले की नही. गर मेरी सूरत को पढ़कर वो पूछता है.क्या तबियत अच्छी नाही.गर सु सु को वो जावे या मैं,हम एक दूसरे से कहते है.मैं जरा आया. एक विस्वास बन गया है एक दूसरे के प्रति.
दो हिंदुत्ववादी भाजप शिवसेना पक्ष युति कर चुनाव लड़े.आज मेरा मुख्यमंत्री बने या तेरा इसलिए एक दूसरे खिलाफ खड़े.जब ये कहते है के हिन्दू धर्म को खतरा है.तो देश का नवजवान सोंच ने पड़ता है और कहता है,'तुम्हाला पर्याय नाही म्हणून आम्ही गप्प आहे,हिंदुत्ववादी मतदार कोनासाठी प्रतिहल्ला करणार" गुमराह हुए वह याब जान गया.निकलना क्या कदम उठाए परेशान हो गया.अपनी दिल की हालत सोशल मीडिया पर कह गया.
तो सभी धर्म इंसानियत का पैगाम देतर है.मगर धर्म का इतिहास के पढ़ने के बाद पता चला के हर धर्म की बुनियादी लड़ाईया अपने से ही और अपने धर्म के दुर्जनोने अपने ही धर्म के खिलाफ स्वार्थ,भेद,लालच के लिए की गई है.चाचा ने भतीजे के साथ भाई ने भी के साथ,मामा ने भानजेके साथ,जो आपस मे ही लड़ पड़े. जो धर्म ग्रंथ और किताबो में लिखा गया है.क्या इसबात से कोई इंकार कर सकता है.आज भी अपने ही अपने धर्म के खिलाफ लड़ रहे है.और धर्म खतरे में है.जिनकी वजह से धर्म को तकलीफ है वही धर्म खतरे में है उस बात को फैला रहे है.
देखे माँ बाप की अहमियत हर धर्म बताते है .अपने अपने धर्म को माननेवाले प्रोपर्टी के लिए जान से मार देते है.कई अनाथ आश्रम में दिखाई देते है.सेवा धर्म है कहा.जब धर्म खतरे में नही, भाई भाई बहनका हक छीन लेता, रिस्तेदारो से दूर रहता है,अपने ही धर्म के लोगो पर जुल्म करता है,उनकी प्रोपर्टी हड़प करता है,अपने ही धर्म की स्त्री पर बलात्कार जैसे संगीन जुर्म करता है,उसपर कई अन्याय करता है तब धर्म के ठेकेदार अपना लब सी लेते है क्या तब उन्हें धर्म खतरे में नजर नही आता?जिंदगी का हर मिनट अधर्म की बाते सोंचता है और करता है.तब धर्म खतरे में दिखाकर खास तौर पे नव जवानों को धर्म खतरे में है यह बात मन में ठसाकर गुमराह किया जाता है.जिसने अब तक धर्म की ए बी सी डी तक नही पढ़ी होती.जब वो होश पकड़े तब तक जिंदगी गुनाहगार बन चुकी होती है.धर्म किसीका खतरे में नही.पोलिटिकल पॉल्युशन की वजह गुमराह हम है.
मेरी बात याद रखना कोई धर्म खतरे में है कि गर बात कहने लगे तो उसके पाखंड को समझ लेना. सावधान हम भी रहना और दूसरे को भी करना . मुसलमानो बादशाहो की बड़ी सल्तनतें रही,अंग्रेजो की हुकुमते!इंसानों पर हुकूमते सैकडों साल की है ना के किसीभी धर्म पर,१८५७ हिंदू मुस्लिम मिल कर लढे पर अंग्रेजो को शिकस्त ना दे पाए .हुकूमते इतनी पॉवरफूल होती है.गर करते तो किसी एक धर्म का भारत देश होता.आज उन्हें अपने धर्म का प्रचार करते नही फिरना पड़ता.धर्म खतरेमे एक नफरत फैलाने वाली राजनीति है.इस खतरे से अपने आप को बचाये. पोलिटिकली पॉल्युशन से अपने आप को बचाईये पर पॉलिटिक्स में आप जैसे सही सोंच और काम करनेवाले का होना भी जरूरी है.
(अफ़ज़ल सय्यद, अहमदनगर.) bjsmindia@gmail.com
दो चार रोज पहले.भारत भर में खुशियों के साथ दिवाली मनाई गई.महंगाई,मंदी जैसी दीगर बाते गर छोड़ दे तो कह सकते है, ठीक ठाक ही है.हम रहते है,उस बस्ती का नाम मुकुंदनगर,वह मुस्लिम बहुल बस्ती है.जिस शहर में रहते है.शहर का नाम अहमदनगर.जहाँ नॉन मुस्लिमोकी आबादी बड़ी संख्या में है.शहर के नाम बदले के बात कभी कबार आकर हवा में खामोश हो जाती है.हमारे मोहल्लेमें दो ही नॉन मुस्लिम रहते है.जिनमे एक ईसाई और हमारे पड़ोस में ही हिन्दू परिवार रहता है.कल सुबह में पड़ोसी वहिनी की मझली बहुने दिवाली की मिठाईया लाकर दी.मैंने उसे कहा,"मैने कल ही याद किया था के,"अब तक वाहिनी ने यहाँसे मिठाईया आयी नाही." मेरा लड़का मेरी तरफ देखने लगा और कहने लगा "ये क्या है." हर साल पड़ोसी वाहिनी के घर से मिठाईया की थाली आती है.
जब रमजान का महीना होता है.हमारे आस पड़ोस के मुसलमानो के घर रोजे के इफ्तारी के लिए फलफ्रूट और समोसे भजिए जैसे तले हुए चीजो की भरी थालिया भेजी जाती है.मकसद रोजदार को खिलाना सवाब (पुण्य)का काम है.और हर घर मे बच्चे ही बड़े खुशीसे रोजदार के लिए घर घर थाली पहुँचाने का काम करते है.बच्चों को फल और तली हुई चीजें ज्यादा पसंद होती है.और हर घर मे बच्चे होते है.इसीलिए जब फलों की थाली लिए जब हमारे घर से बच्चे निकलते है,मेरी सख्त ताकीद होती है घरवालोसे के,पहली थाली पड़ोस के नॉन मुस्लिम(हिन्दू)परिवार के घर जाए.क्यो के उनके घर मे भी बच्चे है और वो सभी मोहल्ले के बच्चो के साथ खेलते कूदते है.एक दूसरे के सहेलियां और दोस्त है.
मुस्लिम मोहल्ले में भेदभाव दिखाई नही देता ऐसी बात नही है.हिंदू मोहल्ले में भी रहने वालों से भी भेदभाव दिखाई नही देता.मैं पिंपरी चिंचवड़ में काटे पिम्पले इलाके में काटे आडनाम (सरनेम) के परिवार ज्यादा थे.उन्ही के किराए से लिए घर मे तकरीबन ३साल से ज्यादा रहा था.किसी भी छोटे से छोटे फक्शन से लेकर बड़े फंक्शन हो या त्योहार बिना मेरे परिवार को छोड़कर मानते ही नही थे.
हमने देखा के हमारे मोहल्ले में उन नॉन मुस्लिम के घर जब कोई चल बसने पर हमारा पूरा मोहल्ला आ खड़ा होता है और उनके दुख को अपना मानकर हर बूढा ही या नावजवान भागदौड़ करता नजर आया था और आता है.सड़क पर कोई हादसा (एक्सीडेंट)घर गिरने पर,आग लगनेपर, सड़क मोटर दुर्घटना पर,बिल्डिंग के छतसे गिरने पर,चक्कर आकर रास्तेमें गिरनेपर,कोई भी कुदरती आफत हो जाए तो हर कोई जाति जाने बिना मदत की इंसानियत के नाते पहुंच कर हर तरह की मदत करता है.खासकर बहोत ही घायल होतो उसकी जान बचाने के लिए बिना जान पहचान अपने जिस्म का खून भी दे देता है.
वही आज कल धर्म के नाम पर हादसों में मोब्लिंचिंग के नाम पर नाम धर्म देखकर जान से मार दिया जाता है.मीडिया और सोशल मिडिया पर इसे चावसे चगलाय जाता है.जब हम वजह जानते है.तो कही मुल्क का चुनाव होता है या प्रदेश का.
मेरे दुकान के बाजू में दुकान मेरे जातवाले की नही. गर मेरी सूरत को पढ़कर वो पूछता है.क्या तबियत अच्छी नाही.गर सु सु को वो जावे या मैं,हम एक दूसरे से कहते है.मैं जरा आया. एक विस्वास बन गया है एक दूसरे के प्रति.
दो हिंदुत्ववादी भाजप शिवसेना पक्ष युति कर चुनाव लड़े.आज मेरा मुख्यमंत्री बने या तेरा इसलिए एक दूसरे खिलाफ खड़े.जब ये कहते है के हिन्दू धर्म को खतरा है.तो देश का नवजवान सोंच ने पड़ता है और कहता है,'तुम्हाला पर्याय नाही म्हणून आम्ही गप्प आहे,हिंदुत्ववादी मतदार कोनासाठी प्रतिहल्ला करणार" गुमराह हुए वह याब जान गया.निकलना क्या कदम उठाए परेशान हो गया.अपनी दिल की हालत सोशल मीडिया पर कह गया.
तो सभी धर्म इंसानियत का पैगाम देतर है.मगर धर्म का इतिहास के पढ़ने के बाद पता चला के हर धर्म की बुनियादी लड़ाईया अपने से ही और अपने धर्म के दुर्जनोने अपने ही धर्म के खिलाफ स्वार्थ,भेद,लालच के लिए की गई है.चाचा ने भतीजे के साथ भाई ने भी के साथ,मामा ने भानजेके साथ,जो आपस मे ही लड़ पड़े. जो धर्म ग्रंथ और किताबो में लिखा गया है.क्या इसबात से कोई इंकार कर सकता है.आज भी अपने ही अपने धर्म के खिलाफ लड़ रहे है.और धर्म खतरे में है.जिनकी वजह से धर्म को तकलीफ है वही धर्म खतरे में है उस बात को फैला रहे है.
देखे माँ बाप की अहमियत हर धर्म बताते है .अपने अपने धर्म को माननेवाले प्रोपर्टी के लिए जान से मार देते है.कई अनाथ आश्रम में दिखाई देते है.सेवा धर्म है कहा.जब धर्म खतरे में नही, भाई भाई बहनका हक छीन लेता, रिस्तेदारो से दूर रहता है,अपने ही धर्म के लोगो पर जुल्म करता है,उनकी प्रोपर्टी हड़प करता है,अपने ही धर्म की स्त्री पर बलात्कार जैसे संगीन जुर्म करता है,उसपर कई अन्याय करता है तब धर्म के ठेकेदार अपना लब सी लेते है क्या तब उन्हें धर्म खतरे में नजर नही आता?जिंदगी का हर मिनट अधर्म की बाते सोंचता है और करता है.तब धर्म खतरे में दिखाकर खास तौर पे नव जवानों को धर्म खतरे में है यह बात मन में ठसाकर गुमराह किया जाता है.जिसने अब तक धर्म की ए बी सी डी तक नही पढ़ी होती.जब वो होश पकड़े तब तक जिंदगी गुनाहगार बन चुकी होती है.धर्म किसीका खतरे में नही.पोलिटिकल पॉल्युशन की वजह गुमराह हम है.
मेरी बात याद रखना कोई धर्म खतरे में है कि गर बात कहने लगे तो उसके पाखंड को समझ लेना. सावधान हम भी रहना और दूसरे को भी करना . मुसलमानो बादशाहो की बड़ी सल्तनतें रही,अंग्रेजो की हुकुमते!इंसानों पर हुकूमते सैकडों साल की है ना के किसीभी धर्म पर,१८५७ हिंदू मुस्लिम मिल कर लढे पर अंग्रेजो को शिकस्त ना दे पाए .हुकूमते इतनी पॉवरफूल होती है.गर करते तो किसी एक धर्म का भारत देश होता.आज उन्हें अपने धर्म का प्रचार करते नही फिरना पड़ता.धर्म खतरेमे एक नफरत फैलाने वाली राजनीति है.इस खतरे से अपने आप को बचाये. पोलिटिकली पॉल्युशन से अपने आप को बचाईये पर पॉलिटिक्स में आप जैसे सही सोंच और काम करनेवाले का होना भी जरूरी है.
(अफ़ज़ल सय्यद, अहमदनगर.) bjsmindia@gmail.com


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