मुझको कुछ कहना है! बाबरी फैसले के बाद...

मुझको कुछ कहना है! बाबरी फैसले के बाद...

      बाबर ने दिये हुए १०० बीघा जमीन पर आज भी विराजमान है आचारी मंदिर.जिस मंदिर में राम,लक्ष्मण सीता के साथ बुद्ध, जैन धर्म के तीर्थकर,गुरुग्रंथ,ईशु मसीह भी है.और इस मंदिर का खर्च  बाबरने दी हुए १०० बीघा जमीन से मिलनेवाले आमदनी से होता है.अब सवाल क्या बाबर मंदिर गिराकर मंदिर बांध सकता है.सुप्रीम कोर्ट ने भी बाबर ने मंदिर गिराकर मस्जिद बनवाया इस इल्जाम को खारिज कर दिया.याने बाबर बेगुनाह साबित कर दिया.
        ९ नवंबर २०१९ का बाबरी मस्जिद विवादित जमीन पर राम मंदिर के निर्माण के लिए २.७७ हेक्टर देने का फैसला सुनवाया गया.मुसलमानो ने हाई कोर्ट के फैसले को समझते हुए,बाबरी मस्जिद की विवादित जमीन का फैसला मंदिर के हक में होंगा पूरी तरह जान लिया था. सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सुनने बाद मुसलमान खामोशी इख़्तियार कर अपने रोज मर्रा के कामो में जुट गया.सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आने के पहले मैं ने मोहल्ले का मुआयना किया.हर कोई अपने अपने कारोबार में लगा हुआ था.हाथ गाड़ी वाले हाथ गाड़ी पर बिक्री के लिए कोई फल फ्रूट,कोई तरकारी,कोई कटलरी,की चाय टी कोई वडापाव,कोई भंगार जमा करने घर से निकल चुके थे.मोची रास्ते के किनारे अपनी दुकान लगाए बैठे थे.ऑटो रिक्षावाले घर से धंदे के लिए निकल चुके थे.पेट्रोल पंप पर सभी मजहब के लोग कोई आगे कोई पीछे लाइन लगाकर रुके हुए थे,मेरा नंबर आएगा  इसलिए आगे बढ़ते नजर आ रहे थे. चौराहे पर पोलिस बंदोबस्त के लिए खड़े हुए थे.सुप्रीम कोर्ट का फैसला मंदिर के हक में आया.किसी पर कोई असर दिखाई नही दिया.चिल्ला पुकार सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक न्यूज मीडिया पर सुनाई दी.सोशल मीडिया पर खामोशी दिखाई दी.
       सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर मुसलमानो ने खामोशी इख़्तियार की है.मायूसी चेहरे पर साफ साफ नजर आ रही थी.हिंदू भाईयोने भी कोई जश्न नही मनाया.ये काबिले तारीफ बात नजर आयी.सुप्रीम कोर्ट ने ही फैसला दिया था.जो हाय कोर्ट से थोड़ा सा अलग था.इनमें एक सी बात हाई कोर्ट का ८०००से ज्यादा पन्ने में तीन हिस्से में एक मस्जिद के हक में थाऔर सुप्रीम कोर्ट के १०४५ पन्ने के फैसले मंदिर को जगह तो दे रहे है.लेकिन मस्जिद को विवादित जगह छोड़ ५ हेक्टर जगह देने की बात कर रहे है.गर मेरी मोटी अक्ल से कहूँ के मस्जिद की जगह से इन्कार नही है.फिर इंसाफ की माद्दा कम फैसला  सिर्फ फैसला मुसलमानो को नजर आ रहा है.सुप्रीम कोर्ट का फैसला जो मुसलमान काबुल कर चुके है.
     सुप्रीम कोर्ट का फैसले के बाद पुर्नविचार याचिका (रिव्हिव पिटीशन) की तरतूद संविधान के की गई है.मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने फेरविचार याचिका दाखल करने  की सोंची है.मीडिया एंकर ने तांडव मचा डाला.जैसे कोई द्रोह किया है पर्सनल लॉ बोर्ड ने.टीवी एंकर तो जज ही बन बैठे.शरिया की आड़ में संविधान को चुनौती जैसी बेतुकी बात कह रहे थे.हिन्दू मुस्लिम समाज के तनाव की बेतुकी बाते कह रहे थे.डिबेट में मुस्लिम वक्ता जी याचिका की फेवर की बात कहे उसकी आवाज साउंड कम हिता भी नजर आया. इससे भी अजीब बात या थी के कुछ मुस्लिम प्रवक्ता खरीदे हुए लग रहे थे.जो फैसले से सारा मुसलमान खुश है कह कर याचिका का विरोध कर रहे थे.खून खराबा होंगा,नफरते बढ़ेगीकुछ भी अनाप शनाप बाते कर रहे थे.कुछ पढे कहने से बेहतर पड़े लिखे लोग मुसलमान पाच एकर जगह एजुकेशन संस्था के लिए हो कह रहे थे.ये वादे लिखे लोग समाज मे कभी नजर नही आये.भारतीय शिक्षण आम लोगोके लिए लेना बहोत महंगा और चीफ हो गया है. उस पर हिंदू मुस्लिम हम सब को मिलकर आवाज उठाने की जरूरत है.मुसलमानो के एजुकेशन संस्था कम नही.चलाने वाले सही नही.ये अलग बात है.
      मुसलमान ड्राइवर अब गाड़ी पर जानेसे डरने लगा है.जानवर का बेपारी गो कशी के नाम पर मारा जाने लगा है.मेरे जैसे सब मजहब के लिए लढाने वालोकी बहोत सारी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है.यहां पड़े लिखे नजर नही आते .बाबरी मस्जिद विवादित जमीन का सुप्रीम कोर्ट फैसला मुसलमानो ने खामोशी से काबुल किया है.इसका फैसला अच्छा है ऐसा तो नही.एडवोकेट भानु प्रतापसिंह ने इस फैसले पर असहमति जाहिर की है.मुसलमान इंसाफ की तलाश में है.हमेशा फैसले ही थोपे जाते है.बाबरी मस्जिद ही हकीकत सब को की पता है.जहाँ बाबर १०० बीघा जमीन आचारी मंदिर को मंदिर के खर्च के लिए इनाम देता है.जिस मंदिर में राम, लक्ष्मण,सीता विराजमान है.क्या मंदिर गिराकर मस्जिद का बाबर पर का इल्जाम बहोत कुछ कुइतिहास बताता नजर आता है.बाबर को अदालत ने बड़ी कर दिया.
      बाबर ने बाबरनामा में कहा है.बाबर से कहा गया था.तू मुसलमान बादशाह है.तो रियासत को मुस्लिम हुकूमत क्यों नही बनाता.बाबरने कहा बादशाह का काम धर्म का प्रचार करना नही है.बल्कि मेरा काम राज कारभार करना.मैं गर बल के आधार पर मुसलमान धर्म अपनाने की जबरदस्ती करू तो राज्यमे असंतोष और अशांति फैल जाएंगी.जबरदस्ती धर्म परिवर्तन की इस्लाम इजाजत नाही देता. तो कैसे बाबर मंदिर तोड़ मस्जिद बना सकता है?सुप्रीम कोर्ट ने अपने जजमेंट में बाबरने मंदिर गिराकर मस्जिद नाही बनाई कहकर बाबर पर लगे इल्जाम को खारिज कर दिया है.
       १८५५ नबाब वाजिदअली ने हनुमानगड़ी की हिफ़ाजत के कइयों से लड़ पड़े थे.औरंगजेब बादशाह ने बालाजी मंदिर को मोरया गोसावी मंदिर को इनाम देने की इनामपत्र पायी जाती है.ऐसे कई इतिहास को छुपाकर धर्म से मुसलमान बादशाह ही बदनाम क्यो?
                                         ( अफजल सय्यद,अहमदनगर )
                                           bjsmindia@gmail.com

टिप्पण्या