"बच्चे को बाहर का हुवा है!"एक अंधश्रद्धा

         "बच्चे को बाहर का हुवा है!"एक अंधश्रद्धा

     आज २७नवंबर २०१९ दिन गुरुवार(जुमेरात) अपने घर से सुबह करीबन साढ़े नौ बजे हर रोज की तरह मैं कलेक्टर ऑफ़िस के करीब पास अपने शॉप पर जाने निकल पड़ा.रास्ते ने हमारे जान पहचान के बुजुर्ग शख्स की मुलाकात हुई. वो भी जब भी रास्तेसे मिलते उन्हें साथ ही मोटर साईकिल पर बिठाकर लाता हुँ. उन्हीका कारोबार भी मेरे शॉप के करीब है.वैसे बुजुर्ग शख्स रोज शेरिंग ऑटो रिक्षा से आते है.मेरे शॉप पर हम पोहोंचे,तो मेरे शॉप सामने ही एक विवाहित कपल लगभग १० या ११ महीने की बच्ची को लिए खड़े थे.मेरे साथ के बुजुर्ग मोटरसाइकिल से उतरते ही विवाहित कपल उनसे मिलकर कहने लगा,"यहाँ बाहर का कौन देखता है?"
मुझको हल्की सी बात सुनाई दी थी.साथ मैं अपनी मोटर साइकिल स्टैंड पर लगाता,तब तक शायद मेरे साथ आये बुजुर्ग ने उन्हीके जान पहचान के किसी बाबा के पास ले गए थे.
     मैंने अबतक शॉप खोली ही नही थी के वो वापस आते नजर आए.जब वो कपल मेरे करीब से जा रहे थे तो,मैने उन्हें आवाज दे पूछा"क्या बात है?"
वो रुक गए.दोनों एक साथ बोले,"बच्चे को बाहर का हुआ है. इसलिए हमारे पडोसवालो यहाँ के बाबा कोई बाबा रहते है.ऐसा बतलाया था."
मैंने कहा ,"अब तुम जिनके साथ गए थे,क्या बाबा मिले?"
बच्चे के बाप ने कहा,"नही, बाबा कही बाहर गए है."
मैंने दोनों से सवाल किया,"क्या हुआ बच्चे को?"
मेरे सवाल पूछते ही दोनों के चेहरे पर खुशी नजर आयी.क्योंके मेरी बड़ी सफेद दाढ़ी,सर पर टोपी पेहराव बहोत ना सही पर बहोत सा बाबा लोगो से मिलता हुआ था.
      मेरे उंगलियों में लाल पीली रंग रंगेली अंगूठियां नही थी.गले मे कोई रंग रंगीला पहरण और मालाएं भी नही थी.जो बाबा लोगो निशानियाँ होती है.वो अब मेरे ओर से इस बात का इंतजार कर करे थे के, मैं कोई बच्चे के बाहर के असरात के बारे में कुछ तो कहूँगा.मैंने दोनों की तरफ देखकर सवाल किया,"किसने आप से कहा है,बच्चे को बाहर का हुआ है?
मेरे सवाल से उनका शायद यकीन लगा के मैं कुछ बच्चे के लिए झाड़ फूँक करूंगा.वो एक साथ कह पड़े,"हमारे अडोस पड़ोस के लोगों ने कहा था और यहॉं पर ही कोई बाबा रहते है ये भी बतलाया था."
मैंने बच्चे को हाथ लगाते हुए पूछा,"ऐसा क्या होता है बच्चे को?"
मेरे सवाल से उनकी नजरे कुछ परेशान सी लगी.बाबा खड़े खड़े ही रास्ते पर पूछ रहे है.यहाँ आसपास बाबा को कोई ठिकाना नजर आ रहा है ना बाबा कही चलने को कह रहे है,रास्ते पर शायद बाबा पूछ रहे है.उनकी नजर मानो मुझसे उनकी दिल की दास्ताँ बयाँ कर रहे थे.
     मैंने बच्चे की माँ से कहा,"बेटे बच्चे को कुछ नही हुआ."बच्चे के माँ बाप की नजर अब मुझे अजब नजर से देखने लगी.बच्चे की माँ मुझसे कहने लगी,"बच्चा रात को सोता ही नही."
मैंने पुछा,"डॉक्टर को बतलाया क्या?"
बच्चे की माँ बोली "हा, आस पड़ोस वाले बोल रहे हैं बच्चे को बाहर का हुआ."
मैंने कहा,"बेटी मैं इस बच्चे को तीन चार मिनट में सुलाकर दिखाऊ क्या? तूने कभी बच्चेको लोरी गाकर सुलाया?"
उसने गर्दन हिलाकर ना का कहा.मैंने दोनों को समजाते हुए कहा,"बेटा किसी बाबा के नाद को ना लगो! इतना भी अंधश्रद्धा में मत पडो. बे फुजूल किसी के बेवजाबात पर इतबार मत करना.और शिकार मत बनाना."
ये सुनते ही बच्चे का दूर जा खड़ा हुआ.
     सच बात किसीसे भले के लिए कहना,उसी को अच्छी नही लगता.ये मेरे लिए नयी बात नही थी.लेकिन बच्चे की माँ मेरी बात को सुन भी रही थी और समझ भी रही थी.आखिर मैंने कहा,"बेटी बच्चे को सुलाना आसान है.पर लोरी गाकर सुनाना भी जरूरी है.जोर जोर से थपट थपटकर डाँट डपटकर बैचे कहाँ सोते है क्या?"
बच्चे की माँ मेरी बात पर हँसकर हमसे दूर खड़े अपने बच्चे के बाप के पास जाकर  दोनों साथ मे,लगता है मेरी बात से प्रभावित होकर अपने घर की तरफ निकल पड़े.मैं उन्हें समझाने में कामयाब हुआ या नही जानता.लेकिन एक कोशिश तो की थी बस इतना जानता हूँ.
     अब मैं अपनी शॉप की तरफ पीछे मुड़ा लॉक खोलते हुए कुशनवाले मामा से कहा" देखा मामा,२०१९ में याने भारतीय स्वातंत्र के ७२ साल भी लोग कंप्यूटर युग मे बाबाओ के चक्कर मे पड़ते है!क्यो भला?"

                                  (अफजल सय्यद,अहमदनगर)
                                   bjsmindia@gmail.mail

टिप्पण्या