रास्ते पर गिरी हुई आधी रोटी का तुकडा मुझसे बोल पडा.....
शु .......शु....... मुझे कोई तो आवाज दे रहा है,ऐसा महसूस हो रहा था.आईबी बंगले के सामने औरंगाबाद रोड हाई वे से सुबह सुबह गाड़िया दोनों तरफ से जा आ रही थी.मैं रास्ते के एक बाजू से घर की तरफ मोर्निंग वॉक से लौट रहा था याने घर वापसी कर रहा था.मैंने मुडकर आसपास नजर डाली कोई भी दिखाई नही दे रहा था "ऐ दाढ़ीवाले बाबा नीचे देख कर तो चला कर"
मैंने आवाज को महसूस कर नीचे जमीन की तरफ देखा तो आधी चपाती का तुकडा रास्ते मे पडा हुआ था.गलती से अपना पैर चपाती याने रोटी पर गिरा तो नही.ये सोचकर मैं अपने आप को गुनाहगार महसूस (गिल्टी फील)कर रहा था,रोटी को रास्तेसे उठाकर किसी पंछी की गीजा(खाना) बने ऐसी जगह रखी जाय ये सोचकर नीचे झुककर उठा लिया.
आधी रोटी के ऊपर लगी मिट्टी को हल्के हाथोंसे से साफ करने लगा. तो मेरे हाथ से छोटा सा टुकड़ा नीचे गिर पड़ा.मैं दूसरे हाथ से रोटी का टुकड़ा उठाने लगा तो आधी रोटी का टुकड़ा बोल उठा,"मैं तुमसे आज कुछ बाते करना चाहता हुँ!"
शु .......शु....... मुझे कोई तो आवाज दे रहा है,ऐसा महसूस हो रहा था.आईबी बंगले के सामने औरंगाबाद रोड हाई वे से सुबह सुबह गाड़िया दोनों तरफ से जा आ रही थी.मैं रास्ते के एक बाजू से घर की तरफ मोर्निंग वॉक से लौट रहा था याने घर वापसी कर रहा था.मैंने मुडकर आसपास नजर डाली कोई भी दिखाई नही दे रहा था "ऐ दाढ़ीवाले बाबा नीचे देख कर तो चला कर"
मैंने आवाज को महसूस कर नीचे जमीन की तरफ देखा तो आधी चपाती का तुकडा रास्ते मे पडा हुआ था.गलती से अपना पैर चपाती याने रोटी पर गिरा तो नही.ये सोचकर मैं अपने आप को गुनाहगार महसूस (गिल्टी फील)कर रहा था,रोटी को रास्तेसे उठाकर किसी पंछी की गीजा(खाना) बने ऐसी जगह रखी जाय ये सोचकर नीचे झुककर उठा लिया.
आधी रोटी के ऊपर लगी मिट्टी को हल्के हाथोंसे से साफ करने लगा. तो मेरे हाथ से छोटा सा टुकड़ा नीचे गिर पड़ा.मैं दूसरे हाथ से रोटी का टुकड़ा उठाने लगा तो आधी रोटी का टुकड़ा बोल उठा,"मैं तुमसे आज कुछ बाते करना चाहता हुँ!"
रोटी के टुकड़े की बातको सुनते ही मैं ताज्जुब में पड गया.
अपने आपसे कह पड़ा,"ये माजरा क्या है ये भाई?"
मैं कुछ देर जगह पर खामोशी से खड़ा रहा. रोटी के टुकड़े ने मेरी खामोशी को मेरी इजाजत जानकर कहने लगी,जैसे मेरे दिल की बात पढ़ ली हो इसी तरह बात की शुरू की मुझसे कहने लगी,"जब तुमने मुझको जमी पर पडा देखा और आसपास देखा,तभी मैं जान गई थी के तुम ये सोंच रहे थे.यहा आसपास कोई होटल है ना कोई बस्ती तो आधी रोटी टुकड़ा आया कहासे है ना?"
मुझे रोटी की इन बातों से काफी हैरत हुई. फिर वो मुझसे कह पडी, "अब पते की बात सुन,आज कल हम बड़े पैमाने पर रास्तेमें कचरकुंडीयों परअक्सर लोग फेंककर यूं जाते है.ये जानते हुए भी खाने(अन्न)को फेकना हर एक मजहब के ऐतेबार से गुनाह(पाप)है और बुरा माना जाता है. कहते है ना,अपने अपने धर्म को सब मानते है, पर धर्मकी बताई बातों कोई आज कहा मानते है! सभी धर्म कहते है ,बची हुई रोटी की ना फेंके. ये भी कहते है हलाल(परिश्रम) की रोटी कमाकर खाये. सभी धर्म कहते है,खाते वक्त हाथ पाव साफ कर कुल्ली कर खाने की हिदायत करते है,कहते है के सीधे हाथ से खाना चाहिए,गिरे हुए रोटी को उठाकर साफ धोकर सूखा कर खाना चाहिए,थोड़ीसी भूख बाकी रखकर खाना चाहिए,जूते चप्पल उतार कर खाना चाहिए, बची हुई रोटी भूखे जरूरतमंद की दे.
बहोत सारे नसीहते मजहबों ने की है. क्या ये सब बाते लोग नही जानते!सभी मजहबी बातों को जानने के बावजूद शादी हो या कोई भी फंक्शन पार्टियों में बहोत सारा खाना प्लेटमें झुटा छोड़ दिया जाता है,बहोत सारा बचा खाना फेंका जाता है.भीख मांगने वाले भी रोकड़ा पैसे मांगते है.खाना लेनेसे मुंह मोडते है.अजब तो ये भी लगता है,माँगनेवाला भी अपने झोली की रोटीयाँ कचरकुंडी या रास्ते मे फेंक देता है.हकीकत से किसे इन्कार नही कर सकता.खाना इतनी आसानी से कमाया जाता है? तो सब जानते है खाना आसानी से कमाया नही जाता.
रोजी पाने को कडी मेहनत करनी पडती है.मेहनत के बावजूद किसीको साहब की बहोत सारी बाते सुननी पड़ती है,साहब को भी उनके साहब की बाते सुननी ही पड़ती है.मजदूर को मालिक की बाते सुननी पड़ती है.रोजी के लिए कई तरह तरह के बेपार करने पड़ते है.बेपारियों को कभी नुकसान उठाना तो नफा भी कमाना पड़ता है. जानते है हम सब के सभी रोजी की हर एक इंसान की हलचल का बुनियादी मकसद अपना और अपने परिवार की पेट की भूख का मिटाना होता है.जिसके लिए अच्छे से अच्छी फल अनाज (धान) जैसी नियामतें कुदरत ने इंसानको दी है.उसमे अनाज (धान)में गेंहू, जवार,बाजरा, चावल के बने दुनियाभर के कीसीभी इंसान ने रोटी हो,ब्रेड पाव हो,बिस्किट से पेट की भूख हररोज इन्सान मिटाता है.
रोटी,पाव,ब्रेड,पके हुए चावल जब मेरी तरह रास्तेमें कही भी या कचरकुंडी में बड़े बड़े शहरोंमें आज के वक्त में बेहिसाब फेंकी जाने लगी है. क्या तुम लोग हमारी अहमियत किमत सब कुछ जानकर समझते क्यो नही ?ऐसा क्यों?" रोटी का टुकडा मुझसे सवाल कर जवाब मांग रहा था. मैं जवाब देता तो क्या देता, खामोश के खामोश रहा.बिना किसी जवाब दिए धीरे धीरे आगे कदम बढ़ाने लगा.क्यो की आधी रोटी के टुकडो के सवालों का मैं क्या जवाब देता. क्या आपके पास कोई जवाब है.
इसलिए चुप हु मैं....सो सॉरी,



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