अब्बा सा कोई नही

अब्बा सा कोई नही,दुनिया मे हर इंसान की जिंदगी का सबसे  अनमोल शख्ससियात उसे जन्म देनेवाले माँ बाप होते है. जिसमे बाप का असर हर इंसान के जिंदगी पर बहोत बडा होता है. एक दूसरे सा दिखाना, बात करनेका लहज़ा,एक नही कई बचपन से लेकर आखिर तक की बहोत सारी यादे असर ही नही करती बल्कि, एक बहोत बडा सबक, पाठ  बनकर  रहे जाती है. जिसे हम जब बाप के किरदार में जीने लगते है, तो हमारे दिल के हमारे अब्बा,बाप,फादर जिस भाषा मे दुनिया भर में जो कोई बुलाते है  तो एक बात जबानपर दिलमे आ जाती है  मेरे अब्बा सा कोई नही.

मैं अब्बा को रोज अपने किरदार में जिने की कोशिश करता हूँ.पर वो बात कहाँ जो अब्बा में थी. अब्बा को जब देखने की कोशिश करता हूँ,तो उनका  मुस्कुराता चेहरा जिसे हरकोई याद करते है.

हरवक्त अपने चेहरेपर मुस्कुराहट रखना आसान नही होता. अपने चेहरेपर मुस्कुराहट उसी वक्त मुमकिन होती है.जब अपनेआप तनावमुक्त ,टेंशनलेस हो,वर्ना ना मुमकिन है.मैंने कई बार अपने को मुस्कुराता रखने की कोशिश की है, पर नाकाम ही रहा हूँ . हर किसीको छोटी छोटी सी बातों पर गुस्सा रोकना इंसान केलिए आज के दौर में मुमकीन ही नही. जब अपने अब्बा का मुस्कुराना गर आज भी  मेरे में खुद के चेहरे आ जाये तो मेरी जिंदगी  कामयाब हो जाएगी.

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